बांस को वृक्ष की श्रेणी से निकालकर घास की श्रेणी में लाने भर से देश में लाखों लोगों की तकदीर बदल गई है। बांस से बने सामानों के धंधे में लगे लोगों के जीवन में आए इस बदलाव पर एक शॉर्ट फिल्म भी बनी है, जिसका प्रीमियर एक अंतर्राष्ट्रीय पोर्टल पर बुधवार को हो रहा है।
विश्व बांस दिवस से दो दिन पहले हो रहे ‘बंबू ऑंत्रोप्रोन्योर’ नामक लघु फिल्म के इस प्रीमियर के जरिए इस काम में जुड़े लोगों के बारे में लोगों को बताया जाएगा। पूर्वोत्तर भारत के तमाम राज्यों के अलावा हाल के दिनों में बांस से बने उत्पादों का प्रचार प्रसार पूरे देश में बढ़ा है। इस फिल्म में देश में बांस उद्योग को बढ़ावा देने का काम कर रही समाजसेवी रेखा डे के नजरिए से पूरे प्रयास और इसके विकास को दिखाया गया है।