द केरल स्टोरी फिल्म पांच मई को रिलीज हुई। महज तीन दिन में यह फिल्म करीब 20 करोड़ रुपये कमा चुकी है। फिल्म की टैगलाइन 'न जमीं मिली, न फलक मिला' सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या इस कदर वहशियानापन इस जमीं पर हो चुका है या हो रहा है? आइए आपको आंकड़ों से रूबरू कराते हैं।
रिलीज होने के बाद से द केरल स्टोरी की चर्चा हर तरफ है। कोई इसे 'द कश्मीर फाइल्स' की तरह हकीकत बयां करती एक और फिल्म बता रहा है तो कुछ इसे विवादित करार दे रहे हैं। आलम तो यह है कि इस फिल्म को लेकर सियासत भी शुरू हो चुकी है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में इस फिल्म पर बैन लगाया जा चुका है तो झारखंड और केरल आदि राज्यों में भी इस पर बैन लगाने की मांग हो रही है। फिल्म की वजह से राज्य की छवि बिगड़ने का दावा किया गया है। ऐसे में इतना तो तय है कि द केरल स्टोरी साल की सबसे चर्चित फिल्म साबित हो सकती है। इस फिल्म में देश की हिंदू और ईसाई महिलाओं की आपबीती दिखाई गई है, जिनका ब्रेनवॉश करके पहले उन्हें इस्लाम कबूल करने पर मजबूर किया गया और बाद में आईएसआईएस आतंकवादी बना दिया गया। डायरेक्टर सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी इस फिल्म के प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह हैं। वहीं, फिल्म में अदा शर्मा, योगिता बिहाणी, सोनिया बलानी और सिद्धि इदनानी ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
फिल्म द केरल स्टोरी की कहानी की बात करें तो इसमें उन हिंदू और ईसाई लड़कियों की सच्ची कहानी दिखाई गई है, जिन्हें इस्लाम को मानने वालों ने लव जिहाद में फंसाया और बाद में आईएसआईएस आतंकी बनने के लिए इराक, सीरिया और अफगानिस्तान भेज दिया। द केरल स्टोरी 5 मई को हिंदी, तमिल, तेलुगू और मलयालम भाषा में रिलीज होगी। ट्रेलर में कहानी की शुरुआत शालिनी उन्नीकृष्णन नाम की लड़की से होती है, जिसका किरदार अदा शर्मा ने निभाया है। ट्रेलर में अदा की एक दोस्त को आईएसआईएस का रिक्रूटर दिखाया गया, जो इस्लाम अपनाने के लिए लड़कियों का ब्रेनवॉश करती है। इसके अलावा लड़कियों की मुलाकात मुस्लिम युवकों से कराती है और उनका निकाह करा देती है। इसके बाद पीड़ित लड़कियों को आईएसआईएस में भर्ती करा दिया जाता है।
अब हम बढ़ते हैं उस सवाल की तरफ, जिसके लिए इस रिपोर्ट को तैयार किया गया। क्या द केरल स्टोरी की कहानी सच्ची है? तो इसका जवाब हां है। दरअसल, साल 2021 के दौरान एक इंटरव्यू में सुदीप्तो सेन ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी से हुई बातचीत के आधार पर बताया था कि राज्य में 32 हजार हिंदू और ईसाई लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। ओमान चांडी ने बताया था कि केरल में हर साल 2800 से 3200 लड़कियां इस्लाम अपना रही हैं। पिछले 10 साल में यह आंकड़ा 32 हजार के पार पहुंच चुका है। फैक्ट चेक के दौरान कई चैनलों ने इस आंकड़े को फेक बताया था, लेकिन जब अफगानिस्तान में तालिबान ने दोबारा हुकूमत कायम की तो वहां की जेल में चार भारतीय महिलाएं कैद मिलीं। जांच में सामने आया कि इन चारों महिलाओं को आईएसआईएस में शामिल होने के लिए अफगानिस्तान भेजा गया था। ये चारों महिलाएं अपने-अपने पति के साथ आईएसआईएस में शामिल होने के लिए खुरासान प्रांत (ISKP) गई थीं। हालांकि, उनके परिजनों ने भारत सरकार से गुहार लगाई थी कि उनकी बेटियों को आजाद कराकर भारत लाया जाए। सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी, जिसके बाद उन्हें अफगानिस्तान की जेल में ही कैद छोड़ दिया गया।
द केरल स्टोरी फिल्म के टॉपिक के साथ-साथ डायलॉग्स भी विवादों के दायरे में हैं। दरअसल, फिल्म में कई ऐसे डायलॉग्स मौजूद हैं, जिन पर आपत्ति जताई जा रही है। इनमें लड़कियों को अपने करीब लाने, उनके खानदान से अलग करने, जिस्मानी रिश्ते बनाने और प्रेग्नेंट करने तक का जिक्र है। ये सभी काम आईएसआईएस के मिशन के लिए करने के निर्देश दिए जाते हैं। अब तक की रिपोर्ट से यह बात तो तय है कि यह फिल्म हकीकत के आसपास बनाई गई है, लेकिन इसे लेकर हो रहे विरोध से इतना तो तय है कि द केरल स्टोरी की आगे की राह इतनी आसान भी नहीं है।