हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सौ साल पूरे होने के बीच एक बड़ा विवाद सामने आ रहा है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि दादासाहेब फाल्के 'फादर ऑफ इंडियन सिनेमा' नहीं हैं और उनकी फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' भी बॉलीवुड की सबसे पहली फिल्म नहीं है।
दादासाहेब फाल्के और उनकी फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' पर यह सवाल उठा रहे हैं पुणे को दो भाई, विजय तोरणे और अनिल तोरणे जिनका कहना है कि उनके पिता दादासाहेब तोरणे 'फादर ऑफ इंडियन सिनेमा' हैं और बॉलीवुड के सबसे पहली फिल्म है 'पुंडलिक' जो उनके द्वारा प्रोड्यूस की गई थी।
दोनों भाई यह दावा कर रहे हैं कि उनके पिता ही सही मायने में 'फादर ऑफ इंडियन सिनेमा' के खिताब के हकदार हैं।
मीडिया सूत्रों के अनुसार, दोनों भाई इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के निदेशक विकास पाटिल के साथ मिलकर मुंबई उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करने वाले हैं जिसमें वह 'पुंडलिक' को बॉलीवुड की पहली फिल्म के रूप में मान्यता देने की बात उठाएंगे।
पाटिल के अनुसार मई 1912 को रामचंद्र गोपाल उर्फ दादासाहेब तोरणे ने कोरोनेशन सिनेमेटोग्राफ थिएटर में फिल्म 'पुंडलिक' को रिलीज किया था और उनके पास अंग्रेजी दैनिक में छपे इसके रिव्यू का प्रमाण भी है।
लेकिन फिल्म के जानकारों का कहना है कि यह बात सही है कि तोरणे को जो सम्मान मिलना चाहिए था वह नहीं मिला लेकिन ऐसा कुछ तकनीकी कारणों से नहीं हो सका।
पहला कारण तो यह रहा कि यह फिल्म दरअसल एक मराठी नाटक की शूटिंग थी। दूसरा कारण यह कि इसे ब्रिटिश कैमरामेन जॉनशन ने शूट किया था जिसने फिल्म का निगेटिव प्रिन्ट अपने पास लंदन में रखा और तोरणे को सिर्फ उसका पॉजिटीव प्रिन्ट दिया।
अब दोनों भाई अपने पिता को हक दिलाने पर तुले हैं और इस मामले में अदालत का हस्तक्षेप चाहते हैं लेकिन यह वक्त ही बताएगा कि दादासाहेब तोरणे को 'फादर ऑफ इंडियन सिनेमा' माना जाएगा या नहीं?