भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं हर्षिणी
हर्षिणी कान्हेकर ने लैंगिक मानदंडों को चुनौती देते हुए पुरुष प्रधान क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। हर्षिणी भारत की पहली महिला फायर फाइटर हैं, जिनका कार्य बुलंद हौंसले को दर्शाता है। उनके इस सफर ने देश भर की महिलाओं को प्रेरित किया है, जो रूढ़िवादिता को तोड़ती है और साबित करती है कि दृढ़ संकल्प किसी भी पेशे में पुरुष हो या महिला एक होता है।
महिलाओं की रोल मॉडल हैं हर्षिणी
2006 में हर्षिनी ओएनजीसी में शामिल हो गईं और आखिरकार, वह अब वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी के पद तक पहुंच गई हैं। उन्होंने मुम्बई, कोलकाता और दिल्ली में आग बुझाने का काम किया और तो और एक टिन फैक्ट्री में छह घंटे तक चले अपने महत्वपूर्ण ऑपरेशन के लिए प्रशंसा अर्जित की। उन्होंने बाढ़, इमारत ढहने, नदी के उफान और वन्यजीव हमलों के दौरान नागरिकों को बचाया है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता प्रदर्शित होती है। आज हर्षिनी पूरे भारत में महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं।
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