चंदू चैंपियन में दिखी मटका किंग की झलक
फिल्म में मुरलीकांत पेटकर 1965 के भारत-पाक युद्ध में घायल होने के बाद लकवाग्रस्त हो जाते हैं। उन्हें मुंबई (तब के बॉम्बे) के एक सैन्य अस्पताल में ले जाया जाता है। जहां, उन्हें टोपाज (राजपाल यादव) के रूप में एक देखभाल करने वाला अस्पताल का परिचारक मिलता है, जिसे जुआ खेलने की लत है। फिल्म में मुरलीकांत को टोपाज को जुआ खेलने के लिए पैसे देते हुए दिखाया गया है। इसके बाद के सीन में रतन खत्री को मटका किंग के रूप में मुख्य अतिथि के रूप में पेश किया गया है।
कौन थे रतन खत्री
रतन खत्री के बारे में बात करें तो उनके बारे में इंटरनेट पर ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। वह सिंध के रहने वाले थे और विभाजन के बाद भारत आ गए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बॉम्बे में बसने के बाद उन्होंने 1960 के दशक में शहर में मटका के रूप में संगठित जुए की शुरुआत की। 70 के दशक तक वह शहर के जुए के सरगना बन गए थे, हर दिन लाखों रुपये कमाते थे। इस वजह से उन्हें बॉम्बे का मटका किंग कहा जाने लगा था। 1975 में आपातकाल घोषित होने के बाद वह जेल भी गए। रतन खत्री ने 90 के दशक में मटका व्यवसाय से संन्यास ले लिया था। साल 2020 में उनका निधन हो गया था।