राज कुमार के एक डायलॉग पर सिनेमाहॉल तालियों से गूंज उठता था। वह अपने संवाद से दर्शकों का दिल जीत लेते थे और बेबाकी के लिए मशहूर थे। वह ना किसी से डरते थे और ना ही किसी के नाराज होने की परवाह करते थे। कब किसकी बेइज्जती कर दे कोई नहीं जानता था।
राज कुमार के एक डायलॉग पर सिनेमाहॉल तालियों से गूंज उठता था। वह अपने संवाद से दर्शकों का दिल जीत लेते थे और बेबाकी के लिए मशहूर थे। वह ना किसी से डरते थे और ना ही किसी के नाराज होने की परवाह करते थे। कब किसकी बेइज्जती कर दे कोई नहीं जानता था। उनका एक डायलॉग 'ना तलवार की धार से ना गोलियों की बौछार से, बंदा डरता है तो सिर्फ पर्वत डिगार से' बेहद लोकप्रिय हुआ था। वह अक्सर लोगों को जानी के नाम से ही बुलाते थे। वह अपने दौर के ऐसे एक्टर थे जिनकी तुनकमिजाजी जगहाजिर थी। पर्दे से इतर वो असल जिंदगी में भी मजाकिया, हाजिरजवाब और गुस्सैल थे।
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फिल्म आंखें में रामानंद सागर राज कुमार को कास्ट करना चाहते थे। इसके लिए वो उनके घर पहुंचे और उनको कहानी भी सुनाई। लेकिन राज कुमार को कहानी पसंद नहीं आई और उन्होंने अपने पालतू कुत्ते को आवाज लगाई और जैसे ही डॉगी उनके करीब पहुंचा तो उन्होंने उससे पूछा- क्या वह इस फिल्म में रोल करना चाहता है। कुत्ते ने उनकी ओर देखा और कुछ नहीं कहा। इस पर उन्होंने रामानंद सागर से कहा कि देखो ये रोल तो मेरा कुत्ता भी नहीं करना चाहता है। यह सुनते ही रामानंद सागर वहां से चले गये। इस घटना के बाद से रामानंद और राज कुमार ने कभी साथ काम नहीं किया।
आंखें फिल्म 1968 में आई और इसमें राज कुमार की जगह धर्मेंद्र ने किरदार निभाया। दरअसल, राज कुमार ने एक फिल्म सिर्फ बदबू के कारण छोड़ दी थी। यह फिल्म जंजीर थी और इसमें बाद में राज कुमार की जगह अमिताभ बच्चन ने काम किया। जंजीर फिल्म से अमिताभ रातों रात स्टार बन गये थे। दरअसल, प्रकाश मेहरा राज कुमार को फिल्म में लेना चाहते थे और इसके लिए वो उनके पास भी पहुंचे और राज कुमार ने उनसे कहा कि तुम्हारे पास से बिजनौरी तेल की बदबू आ रही है और हम फिल्म तो दूर तुम्हारे साथ एक मिनट खड़ा होना भी बर्दास्त नहीं कर सकते हैं।