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तब गुस्सा आया लता दीदी को : उत्तम सिंह

Wed, 28 Sep 2016 11:22 PM IST
अमित कर्ण/अमर उजाला, मुंबई
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- फोटो : koimoi.com
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मशहूर संगीतकार और वायलिन वादक उत्तम सिंह को सदी की आवाज लता मंगेशकर के 87वें जन्मदिन पर आज ‘लता मंगेशकर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार’ दिया जा रहा है। उत्तम सिंह ने इसके लिए लता मंगेशकर का शुक्रिया अदा किया है। 
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दोनों लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं। ‘मैंने प्यार किया’ और ‘हम आपके हैं कौन’ में उत्तम सिंह  म्यूजिक अरेंजर थे, पर उनके कहने पर भारत रत्न लता मंगेशकर ने गाना गाया था। लता मंगेशकर के बारे में उत्तम सिंह ने अनछुए और अनकहे किस्सो की पोटली खास अमर उजाला के साथ खोली है। पोटली से क्या कुछ निकला, आइए जानते हैं।

उत्तम सिंह कहते हैं, ' उन्होंने मुझ पर सदा आर्शीवाद बनाए रखा। ‘मैंने प्यार किया’ में मैं म्यूजिक अरेंजर था। मेरे कहने पर उन्होंने 17 साल बाद किसी फिल्म के लिए गाना गाया था। उन्होंने शुरू में तो मना कर दिया था, पर फिल्म से मेरे जुड़े होने के चलते वे मान गईं। दीदी हर डायरेक्टर, एक्ट्रेस और गीतकार का सपना होती थीं। 
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मैं खुशकिस्मत हूं, जो उन्होंने मुझे बतौर संगीतकार पहली फिल्म से लेकर आज तक आर्शीवाद दिया। वह चाहे ‘पेंटर बाबू’ हो या ‘वारिस’। दुश्मन हो या दिल तो पागल है जैसी फिल्में। वह भी सिर्फ एक गाना नहीं, फिल्म के सभी गाने। बाकी म्यूजिक डायरेक्टर तो मेरी किस्मत से जलते थे।

नंगे पांव गाना गाती हैं लता दीदी

लता दीदी यूं ही महान नहीं बनी हैं। वे इस उम्र में भी खूब रियाज करती हैं। मैं ‘दिल तो पागल है’ का एक किस्‍सा बयान करना चाहूंगा। गाने की रिकॉर्डिंग चल रही थी। दीदी स्टूडियो आईं और सीधा रिकॉर्डिंग रूम में नहीं गईं। उन्होंने पहले कई घंटे रियाज किया। उसके बाद वे गाने को आईं। 

एक तो उनकी खासियत है कि वे नंगे पांव और खड़े होकर गाना गाती हैं। अगर दो घंटे-तीन घंटे भी खड़ा होना पड़े तो वे खड़ी रहती हैं। बहरहाल दिल तो पागल है का एक गाना पूरा रिकॉर्ड हो गया, पर मैंने उनसे रिक्वेस्ट की कि दीदी दूसरा अंतरा फिर से रिकॉर्ड कर लें? उन्होंने कहा, सिर्फ दूसरा अंतरा ही क्यों? फिर से शुरू से रिकॉर्ड करते हैं न। फिर उन्होंने पूरा गाना फिर से गाया। तो ऐसा उनका समर्पण भाव है गायकी के प्रति। आज के गायक तो एक-एक लफ्ज पिक करते रहते हैं। वे क्या फील दे पाएंगे?

लता दीदी की खासियत रही है कि वे हर पीढ़ी के गीत-संगीतकारों के साथ काम कर लेती हैं, मगर कुछ चीजें उन्हें पसंद नहीं। बात आठवें दशक के बाद की है। तब डबल मीनिंग गाने बहुत आने लगे थे। उससे वे आहत थीं। उन्होंने न गाने का मन बना लिया। वैसे गाने चाहे जिस किसी गीत-संगीतकार के रहे, लता दीदी ने नहीं गाया। उन्होंने गानों की छंटनी शुरू कर दी। 

वे रिकॉर्डिंग से पहले गीत को अपने घर व ऑफिस में ही चेक करना शुरू किया। वे संगीतकारों से यह भी सुनिश्चित करतीं कि उनका अरेंजर कौन है? जिन मामलों में मैं अरेंजर हुआ करता, लता दीदी उन्हीं गीतों को हरी झंडी देतीं। वह इसलिए कि मैं भी उनके पास डबल मीनिंग वाले गाने पहुंचने ही नहीं देता था।
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गला खराब तो रिकॉर्डिंग रद्द

उत्तम सिंह - फोटो : amar ujala
वे सेहत को लेकर सचेत रहती थीं। गला हमेशा दुरुस्त रहे, उसके लिए वे बाहर का खाना बिल्कुल नहीं खाती थीं। जिस दिन उन्हें गाना होता था, वे उस सुबह पहले उस गाने पर रियाज करतीं थीं। अपनी परफॉरमेंस अच्छी लगने पर ही वे दोपहर को रिकॉर्डिंग स्टूडियो जातीं। 

गला खराब होता तो वे गाने की रिकॉर्डिंग रद्द कर देती थीं, चाहे किसी का कितना ही बड़ा नुकसान क्यों न हो? यह नहीं कि खराब गले में भी जरा सी ऊंच-नीच पर ही सही गा लेते हैं। जब तक उनका गला ठीक नहीं होता, तब तक वे आती नहीं थीं।

100 संगीतकारों के संग गाना
मैं तो दीदी का ताउम्र आभारी रहूंगा। मेरी पहली फिल्म पेंटर बाबू के गानों का आगाज दीदी की आवाज से ही हुआ था। उसमें 120 संगीतकार और 46 कोरस गाने वाले मौजूद थे। उस  माहौल में दीदी और महेंद्र कपूर बाबू ने अपनी आवाज से समां बांध दिया। उससे पहले अरेंजर और वायलिन वादक के तौर पर मैं उनके साथ कई फिल्में कर चुका था।
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