हिन्दी फ़िल्मों में विदेशी महिला कलाकारों की दबदबा बढ़ता ही जा रहा है। किसी गाने में हीरो हीरोइन के साथ नाचने वाली जूनियर आर्टिस्ट से लेकर लीड हीरोइन तक के रोल में कई विदेशी सुंदरियां नज़र आ रही हैं।
आज ना केवल रूस से बल्कि यूरोप, अफ़ग़ानिस्तान, अमरीका और ग्रीस जैसे देशों से कलाकार हिन्दी फ़िल्मों में काम करने के लिए आ रही हैं।
लेकिन सभी को मौका मिले ऐसा नहीं होता। इनमें से कुछ ही ऐसी खुशनसीब होती हैं जिन्हें शोहरत की बुलंदियां हासिल हो पाती हैं। लेकिन जो सफल नहीं हो पाती वो भी यहीं रह जाती हैं।
कैसे मिलता है बॉलीवुड में काम?
जब हम विदेशी लड़कियों को हिंदी फ़िल्मों में देखते हैं तो कई बार ख़्याल आता है कि कैसे मिलता है इनको बॉलीवुड में काम? हम सोचते हैं, जब ये फ़िल्में नहीं कर रही होती तो एक पराए देश में कैसे करती हैं गुज़ारा?
हमने यही सवाल पूछे विदेशी महिला कलाकारों को मुंबई में काम दिलने वाले एजेंट किंग्सले से। किंग्सले कहते हैं, "विदेशी बालाओं को काम वर्क परमिट पर मिलता है। इन लड़कियों को काम इसलिए भी बहुत मिलता है क्यूंकि ये बहुत गोरी होती हैं, बहुत सुन्दर दिखती हैं, बहुत अच्छा नाचती हैं। इतने सारे गुण होने के नाते उन्हें आसानी से काम मिल जाता हैं।"
आजमाए जा रहे कई नए तरिके
आज कल ज़्यादातर हीरो अपनी फ़िल्मों की शूटिंग विदेश में करते हैं और पूरे क्रू के सदस्यों को विदेश ले जाना मुश्किल होता है। ऐसे में भारत में रहने वाली इन लड़कियों को भी काम मिल जाता है।
किंग्सले बताते हैं, "ऐसी कई फ़िल्में हैं जिनकी शूटिंग में विदेश का सेट दिखाना होता है। ऐसे में हम मुंबई घूमने आए विदेशी पर्यटकों से संपर्क करते है और उन्हें भी सेट पर शूट करते हैं। ऐसा करने से पता ही नहीं चलता की फ़िल्म की शूटिंग विदेश में नहीं बल्कि मुंबई में ही हुई है।"
विज्ञापनों में भी है इन विदेशी बालाओं के लिए 'काम'
फ़िल्मों के अलावा विज्ञापन जगत में भी इन विदेशी बालाओं को काफ़ी काम मिलता है। मद्रास कैफ़े, बुलेट राजा जैसी फ़िल्मों के कास्टिंग डायरेक्टर जोगी मलंग कहते हैं, "विदेशी लड़कियों को ब्यूटी प्रोडक्ट के लिए ज्यादा तरजीह दी जाती है।
हम देखते हैं कौन सी लड़की थोड़ी बहुत इंडियन दिख रही है और तब हम उनसे साबुन, क्रीम, शैम्पू, कंडीशनर और तो और परफ्यूम का ऐड भी करवाते हैं। इस काम के लिए इन लड़कियों को अच्छे खासे पैसे मिल जाते हैं।"
लेकिन कई बार ये भी कहा जाता है कि ये विदेशी लड़कियों काम ज़्यादा न मिलने पर वेश्यावृत्ति करने लगती हैं। इसपर अफ़ग़ानिस्तान से आई रोया ख़ान कहती हैं, "2010 में मैं फ़िल्मों में काम करने के लिए भारत आई और तब मुझे कई लोगों ने कहा की छोटे छोटे कपड़े पहनने पड़ेंगे, शराब और सिगरेट पीना पड़ेगा, दिन रात पार्टी में जाना है, लेकिन मैंने ये सब करने से मना कर दिया।"
कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है
इन विदेशी बालाओं में एक्टिंग के अलावा भी और भी कई गुण हैं वहीं धर्म आदि कई आधारों पर इन्हें कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। रोया कहती हैं, "क्यूंकि हम मुस्लिम हैं तो हमारे धर्म में इसकी इजाज़त नहीं है।"
मुंबई में क्या उन्हें इस तरह का सामना करना पड़ा या नहीं, इसपर रोया ने बताया, "कई लोग तो सीधा मुँह पर कहते हैं, लड़की चाहिए। और तब मैं भी उनके मुँह पर कहती हूँ सॉरी सर मैं कोई दलाल नहीं कलाकार हूँ।"
और भी कई हुनर हैं इन विदेशी बालाओं में
ग्रीस से आई केल्ली रोइ का भी मानना है कि विदेशियों के लिए मुंबई में पैसे कमाने के बहुत से ज़रिए हैं। वे कहती हैं, "हम एक्टिंग करते हैं, ऐड फ़िल्म्स, मॉडलिंग, थिएटर और अगर कुछ नहीं मिला तो हमारी टीचिंग स्किल्स अच्छे हैं तो हम यहां अंग्रेजी पढ़ाने का भी काम करते हैं।"
वेश्यावृत्ति की बात को सिरे से नकारते हुए केल्ली कहती हैं, "हाँ कुछ लोग ज़रूर इससे जुड़े होंगे लेकिन मेरी जानकारी में ऐसा कोई नहीं।"
केल्ली आगे कहती हैं, "मेरी राय पूछें तो मुझे इस मैं कुछ भी ग़लत नहीं लगता क्यूंकि मैं आज़ाद ख्यालों वाली महिला हूँ। लेकिन मेरी ऐसी कोई दोस्त नहीं हैं जिसे अपना गुज़ारा करने के लिए इस तरह का रास्ता अपनाना पड़ा हो।"