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Vivek Agnihotri: विवेक अग्निहोत्री ने फिर खोला बॉलीवुड का कच्चा-चिट्ठा, लोनली डेथ्स पर जाहिर किया दुख

Thu, 03 Aug 2023 10:57 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

नितिन देसाई के असामयिक निधन से पूरा बॉलीवुड सतके में है। इसी कड़ी में फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ट्वीट कर इंडस्ट्री का कच्चा-चिट्ठा खोलते नजर आए हैं। साथ ही लोनली डेथ्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 
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विवेक अग्निहोत्री - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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विवेक अग्निहोत्री संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। साथ ही सम-सामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखकर सुर्खियों में आ जाते हैं। इसी कड़ी में फिल्ममेकर ने बॉलीवुड की लोनली डेथ्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक लंबे नोट में, विवेक ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि अंत में आप केवल एक हारे हुए व्यक्ति हैं। मशहूर कला निर्देशक नितिन देसाई की मौत के बाद विवेक का यह पोस्ट काफी लाइमलाइट बटोर रहा है।

आप एक हारे हुए व्यक्ति हैं- विवेक 

विवेक अग्निहोत्री ने ट्विटर पर साझा किए गए अपने इस नोट में लिखा, 'यह एक ऐसी दुनिया है, चाहे आप कितने भी सफल क्यों न हो जाएं, अंत में आप केवल हारे हुए व्यक्ति ही होते हैं। अंततः, सब कुछ आपके आसपास है, लेकिन आपके साथ कुछ भी नहीं। आपके लिए। आपके द्वारा। सब कुछ तेजी से आता है- प्रसिद्धि, महिमा, पैसा, प्रशंसक, चापलूस... कवर, रिबन, महिलाएं, मामले... वह सब कुछ जिसे आप सफलता के साथ जोड़ सकते हैं, आपको यहां मिलता है। साथ ही, बॉलीवुड आपको किसी भी तरह के नैतिक या नैतिक दबाव से मुक्त करता है। आप हत्या, आतंकवाद, बलात्कार या नशे में गाड़ी चलाने से बच सकते हैं।'

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वित्तिय स्थिति-प्रसिद्धि पर विवेक के विचार

फिल्ममेकर ने नोट में वित्तिय स्थिति और प्रसिद्धि के बारे में लिखा, 'एक बार पैसा आता है, तो बरसता है। आप हमेशा मध्यम वर्ग के रहे हैं। आप नहीं जानते कि इस पैसे का क्या करें। आप बड़ा निवेश करें, क्योंकि जिन लोगों पर आप भरोसा करते हैं, वही आपको ऐसा करने की सलाह देते हैं। जो बात कोई नहीं बताता वह यह है कि इस बुरी दुनिया में कभी किसी पर भरोसा मत करना धीरे-धीरे नई पीढ़ी आती है। आप अप्रासंगिक होने लगते हैं, लेकिन प्रसिद्धि, पैसा और प्रासंगिकता की आपकी लत इतनी तीव्र है कि आप इसकी मांग करने लगते हैं। जितना अधिक तुम मांग करते हो, उतना अधिक तुम अलग-थलग हो जाते हो। यह एक अंधेरी सुरंग है जिसमें आप अकेले ही गिरते चले जाते हैं। उस सुरंग में क्या हो रहा है यह सिर्फ आप ही जानते हैं।'

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यह अंत सामान्य है- विवेक 

विवेक ने आगे जोड़ा, 'आप बात करना चाहते हैं लेकिन कोई भी स्वतंत्र नहीं है। आप अपने आप से बात करें, लेकिन आप यह भी नहीं जानते कि अपनी बात कैसे सुनी जाए। आपके पास रखने के लिए कुछ भी नहीं है। आपने कभी भी परिवार, दोस्तों, मूल्यों, नैतिकता, दया, कृतज्ञता में निवेश नहीं किया, तो आपके पास कोई नहीं है। आपके पास कुछ भी नहीं है, इसलिए पैसा और प्रसिद्धि भी नहीं है। आपने स्वयं में निवेश किया है, इसलिए आपके पास केवल आप ही हैं। अपने सबसे कुरूप रूप में, लेकिन बिना मेकअप के आप खुद को पसंद नहीं करतीं। प्रशंसकों के बिना आपके ऊपर छत पर केवल एक पंखा ही बचा है। अफसोस की बात है कि यह पंखा आपका एकमात्र प्रशंसक बन जाता है जो आपके अकेले और दुखी जीवन को समाप्त करने में आपकी मदद करता है। कुछ वहीं लटके रहते हैं हर पल मरते रहते हैं। कुछ तो खुद को फांसी लगा लेते हैं, यह सामान्य अंत है।'

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