अधिकांश सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि यासिर ने गाने को रिलीज करने के लिए रमज़ान के पवित्र महीने को चुना, जो उनके अनुसार उनकी धार्मिक भावनाओं को आहात करने के लिए किया गया है। एक ट्विटर यूजर ने पूछा, "इस तरह हम धर्म का इस्तेमाल करते हैं।" एक अन्य ने लिखा, कच्चा बादाम का हलाल वर्जन आ गया"। वहीं एक यूजर ने लिखा "एक बार कहके दख लो के इस्लाम में संगीत हराम है, क्या पता इसका ईमान बच जाए और हमारा दिमाग।"
वीडियो और गाना दोनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कुछ ही महीनों में, ट्रैक को 21 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। कई लोगों ने मूल गीत का रीमेक वर्जन बनाने की कोशिश की हैं, जिनमें से अधिकांश वायरल भी हुए।