एक्टर को पिता से मिली ये सीख
संवाद में अभिनेता सुनील शेट्टी से पूछा गया कि आपके पिताजी ने ऐसा क्या सिखाया जो आपके लिए जिंदगी का पाठ बन गया? इस पर उन्होंने कहा, 'सच्चाई का पाठ। जब आप सच्चे और ईमानदार होते हैं तो आपके अंदर डर नाम की चीज नहीं होती। जब आपको पता होता है कि इरादतन आप कुछ गलत नहीं कर रहे तो डर नहीं होता है। आप सोचते हो कि मैं यह काम कर सकता हूं, क्योंकि मैं ईमानदार हूं तो आप उस चीज को हासिल कर लेते हो। आपको डरने और हिचकिचाने की जरूरत नहीं है। यह मेरे पिताजी ने सिखाया'। अभिनेता ने इसका उदाहरण भी दिया।
कमाठीपुरा से निकालीं 400 बच्चियां
सुनील शे्टटी ने कहा, 'उदाहरण दूं तो मुंबई के कमाठीपुरा जैसी जगह पर 400 बच्चियां फसी हुई थीं। उन्हें कैसे निकाला जाए। हमने सोच लिया कि उन्हें निकालेंगे। लेकिन पुलिस का साथ होना जरूरी था। लेकिन, हमने सोच लिया कि नहीं हो जाएगा। तब हमारा इरादा नेक था। 400 बच्चियों को यह कहा गया कि आपको चुप रहना है। उन बच्चियों ने वादा निभाया। पुलिस, गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री को जब बताया गया तो उन्होंने भी महसूस किया कि यह नेक काम है। तो उस काम में हमें सभी का साथ मिला। जब आप सकारात्मक चीजें सोचते हैं तो नकारात्मक चीजें आपके साथ नहीं होतीं। ऐसा पहले कभी हुआ नहीं है शायद। हमारे अंदर डर नहीं था, क्योंकि हमारी इंटेन्शन साफ थी। यह छोटी-छोटी चीजें हैं, लेकिन बहुत महत्वपूर्ण हो सकती हैं'।
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सुनाया जैकी श्रॉफ से जुड़ा दिलचस्प किस्सा
एक्टर ने आगे कहा कि अपनी जड़ों से जुड़े रहना इंसान के लिए बहुत जरूरी है। संवाद में उनसे पूछा गया कि कभी आप पुराने घर, गलियों में जाते हो तो लगता है कि मुझसे अमीर यहां की यादें हैं? इस पर उन्होंने कहा, 'बिल्कुल लगता है। छोटे घरों में दरवाजे एक-दूसरे के लिए खुले रहते हैं। बड़ी इमारतों में हमें नहीं पता होता कि पड़ोस में कौन रहता है। जैकी दादा (जैकी श्रॉफ) हमेशा एक जरूरी बात बताते हैं- जब वो एक खोली (कमरे) में रहते थे और मां खांसती थीं तो उन्हें पता चल जाता था कि उन्हें दवा-पानी की जरूरत है। जब वो पांच बेडरूम के फ्लैट में चले गए तो एक ही घर में रहते हुए मां खांसते-खांसते गुजर गईं और उन्हें पता नहीं चला। ...हम जिंदगी में बड़ा घर, बड़ी गाड़ी चाहते हैं, लेकिन यह मायने नहीं रखता। परिवार के साथ मिल-जुलकर रहना सबसे जरूरी है'।