पहला मौका कब मिला ?
सुनील शेट्टी से संवाद में पूछा गया कि एक्टिंग का पहला ब्रेक आपके पास किस तरह से आया था? क्या उत्सुकता थी? माता-पिता की क्या प्रतिक्रिया थी? इस पर अभिनेता ने कहा, 'एक्टिंग का ऑफर इसलिए आया, क्योंकि मैं मार्शल आर्टिस्ट था। जिंदगी में एक स्टेज आती है हमेशा। जब मुझे फिल्मों का पहला ऑफर हुआ तो वह दौर था, जब डीवीडी पर फिल्में आने लगी थीं। लोगों ने सोचा कि कोई थिएटर जाएगा नहीं, और लोग घर बैठे-बैठे फिल्में देखेंगे। उस परिवर्तन के दौर में एक्शन बहुत चल रहा था। मैं मार्शल आर्ट बैकग्राउंड से आता हूं। किसी ने मुझे स्टेज पर लाइव देखा। उन्होंने मुझे ऑफर किया। एक टफ दौर में मुझे मौका मिला, क्योंकि एक्शन ही है जो मास तक पहुंचता है। मुझे मौका मिला'।
एक्टर के पिता ने दी यह साल
सुनील शेट्टी ने आगे बताया,'ऑफर मिलने की बात मैंने पिताजी को जाकर बताई। उन्होंने कहा कि ध्यान देकर काम करोगे। रेस्टोरेंट के बारे में और बाकी चीजों के बारे में भूल जाओगे। लेकिन एक बात याद रखना कि एक छोटे से गांव का लड़का, मैंगलोर से जब निकलेगा तो पहले अपने गांव, अपनी कौम के बारे में सोचकर कोई स्टेप लेना। मैंने तभी तय किया कि मैं अपनी जिंदगी में कितना हासिल करूंगा मैं नहीं जानता हूं, लेकिन जब निकलूंगा तो एक गुडविल के साथ निकलूंगा। लोग कहें कि यह बहुत ईमानदार इंसान है'।
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एक्शन से ट्रांसिट क्यों और कैसे किया?
एक्टर से आगे पूछा गया कि उस समय एक्शन फिल्में बहुत आ रही थीं। क्या आपको ऐसा लगा कि मैं रोमांस वाले रोल भी कर सकता हूं, तो वैसे रोल भी मेरी तरफ आने चाहिए? सुनील शेट्टी ने कहा, 'बिल्कुल ऐसा लगता था। एक्शन फिल्में सक्सेसफुल थीं। खासतौर से जब बेटी हुई और बेटी, मां और पत्नी फिल्में देखते थे। मैं घर जाकर पूछता कि कैसी लगी फिल्म ? वो बोलते बहुत अच्छी लगी। साथ ही मैं ये भी देखता कि घर में सिरदर्द की गोलियां बहुत हैं, क्योंकि एक्शन देखकर सबके सिर में दर्द होने लगता था। जब सिरदर्द की गोलियां ज्यादा इस्तेमाल होने लगीं तब मुझे एहसास हुआ कि कुछ और करना चाहिए। तब मैंने 'गोपी किशन', 'धड़कन' और 'हेरा फेरी' जैसी फिल्में करने की कोशिश की। मेरी बहुत सारी फिल्में नहीं चलीं। मैं हारा। ट्रांजीशन लोगों को पसंद नहीं आया, लेकिन लगातार ट्राई करने के बाद मैं कहीं न कहीं जाकर सेटल हो गया'।