पंजाब के इतिहास को ऐतिहासिक संदर्भ से देखना होगा
वह आगे कहते हैं, ‘फिल्म में दिखाई गई घटनाएं उस समय की हैं, जब पंजाब और केंद्र सरकार, दोनों जगह कांग्रेस पार्टी की सरकार थी। इसलिए फिल्म या उस दौर के चित्रण से जुड़ी बातों के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराने की कोई भी कोशिश राजनीतिक मकसद से प्रेरित है और तथ्यों के आधार पर गलत है।’
रवनीत सिंह बिट्टू ने आगे कहा, ‘उग्रवाद का कोई धर्म नहीं होता और हिंसा को कभी भी महिमामंडित नहीं किया जाना चाहिए या किसी समुदाय या आस्था से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। पंजाब के इतिहास को चुनिंदा कहानियों या राजनीतिक प्रचार के बजाय तथ्यों, सत्यापित रिकॉर्ड और ऐतिहासिक संदर्भ के जरिए देखा जाना चाहिए।’
फिल्म 'सतलुज' में दिलजीज दोसांझ
- फोटो : इंस्टाग्राम@diljitdosanjh
क्यों विवाद में आई फिल्म ‘सतलुज’
दिलजीत दोसांझ ने 'पंजाब95' नाम से एक फिल्म की थी, जो सेंसर बोर्ड के पास तीन साल तक अटकी रही। फिर 'सतलुज' नाम से शुक्रवार को ओटीटी पर रिलीज हुई। लेकिन दो दिन बाद इसे ओटीटी प्लेफॉर्म से हटा दिया गया। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने को कहा। अब इसके कंटेंट की जांच भी की जाएगी।
क्या है फिल्म की कहानी?
हनी त्रेहान की निर्देशित फिल्म ‘सतलुज’ पंजाब के एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। बता दें कि जसवंत सिंह ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। 1995 में उनका अपहरण कर लिया गया था और उसके बाद वे कभी नहीं दिखे। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है।
इस फिल्म की कहानी देखकर फैंस के रोंगटे खड़े हो गए थे। फिल्म में दिलजीत के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे कलाकार अहम किरदारों में नजर आए हैं।