'फुले' की कहानी
'फुले' एक बायोग्राफिकल फिल्म है, जो 19वीं सदी में भारत में जातिगत भेदभाव, अशिक्षा और लैंगिक असमानता के खिलाफ लड़ने वाले महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले के जीवन पर आधारित है। फिल्म का निर्देशन अनंत महादेवन ने किया है और इसमें प्रतीक गांधी और पत्रलेखा ने मुख्य किरदार निभाए हैं। इसके अलावा विनय पाठक, सुरेश विश्वकर्मा और दर्शील सफारी जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं।
फिल्म पर क्या बोले रामदास अठावले
रामदास अठावले ने फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद कहा, 'यह फिल्म ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले के योगदान को शानदार तरीके से दर्शाती है। इसे हर किसी को, खासकर हमारे सांसदों को देखना चाहिए, ताकि वे सामाजिक मुद्दों को बेहतर समझ सकें। मैं इस फिल्म को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी दिखाने की सिफारिश करता हूं।' उन्होंने यह भी मांग की कि फिल्म को पूरे भारत में टैक्स-फ्री किया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें।
निर्देशक ने जताया आभार
फिल्म के निर्देशक अनंत महादेवन ने अठावले के समर्थन पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, 'हमने 'फुले' को इतिहास के प्रति पूरी ईमानदारी के साथ बनाया है। मुझे बहुत खुशी है कि अठावले जी ने इस फिल्म का समर्थन किया। उनका यह समर्थन हमारे लिए बहुत मायने रखता है।' अनंत महादेवन ने बताया कि फिल्म को बनाने में उनकी टीम ने दिल और आत्मा झोंक दी है, ताकि फुले दंपती की प्रेरणादायक कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
रिलीज से पहले विवाद
'फुले' की रिलीज से पहले कुछ समूहों ने इसकी कहानी में जातिगत भेदभाव के चित्रण पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, फिल्म के रिलीज होने के बाद इसने दर्शकों का दिल जीत लिया। यह फिल्म न केवल फुले दंपती के संघर्ष को दिखाती है, बल्कि आज के भारत में भी उनकी शिक्षाओं और सुधारों की कहानी भी पेश करती है।
'फुले' को डांसिंग शिवा फिल्म्स और किंग्समेन प्रोडक्शंस ने मिलकर प्रोड्यूस किया है, जबकि इसका वितरण जी स्टूडियोज ने किया है। फिल्म की कहानी और इसके किरदार दर्शकों को 19वीं सदी के भारत की सामाजिक चुनौतियों की गहराई में ले जाते हैं।