फिल्म बैटल ऑफ गलवां
सलमान खान ने 27 दिसंबर को अपने 60वें जन्मदिन पर 'बैटल ऑफ गलवां' का टीजर रिलीज किया। यह फिल्म लद्दाख की गलवां घाटी में 2020 की झड़प से प्रेरित है। फिल्म का निर्देशन अपूर्वा लखिया ने किया है। सलमान कर्नल बी. संतोष बाबू के किरदार में हैं, जो भारतीय सेना की 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। फिल्म शहीद सैनिकों की बहादुरी को सलाम करती है और मुश्किल हालात में उनके साहस को दिखाती है।
'बैटल ऑफ गलवां' का विवाद
'बैटल ऑफ गलवां' के टीजर में सलमान कहते हैं, 'मौत से क्या डरना, उसे तो आना है।' इससे फिल्म का देशभक्ति वाला माहौल बनता है। टाइम्स नाउ की एक खबर के मुताबिक, भारतीय फैंस ने इसे सलमान का सबसे दमदार रोल बताया। लेकिन चीन में कुछ लोगों ने इसे पक्षपाती बताया और कहा कि घटनाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है। सलमान को चीन में 'बजरंगी भाईजान' से काफी फैंस मिले थे, लेकिन अब वहां आलोचना हो रही है।
गलवां की लड़ाई क्या थी?
टाइम्स नाउ की एक खबर के मुताबिक, गलवां की लड़ाई जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प थी। यह भारत-चीन की सीमा रेखा (एलएसी) पर हुई। दोनों देशों के बीच सीमा पर विवाद है। 15 जून 2020 को तनाव बहुत बढ़ गया। दोनों तरफ सैनिकों की संख्या बढ़ा दी गई थी। जून में बातचीत हुई और पीछे हटने की सहमति बनी, लेकिन चीनी शिविर देखकर भारतीय सैनिक जांच करने गए। बात हाथापाई में बदल गई। बंदूक इस्तेमाल न करने के पुराने समझौते की वजह से लाठी, पत्थर और बाकी चीजों से लड़ाई हुई। यह रात में बहुत ठंडे और मुश्किल हालात में हुई। इसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए। यह 45 साल में सबसे बड़ा नुकसान था। कोई गोली नहीं चली। कई सैनिक ठंड और चोटों से मारे गए। कुछ गलवां नदी में गिर गए। चीन ने पहले अपने नुकसान नहीं बताए, बाद में 2021 में कहा कि उनके 5 सैनिक मारे गए।
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