टाइगर श्रॉफ की फिल्म 'मुन्ना माइकल' का फैंस को काफी वक्त से इंतजार था। डांस पर आधारित इस फिल्म के जरिये टाइगर ने अपने गुरू माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि दी है। उनका धमाकेदार डांस कमाल दिखा पाया है या नहीं, पढ़िए इन 10 प्वाइंट्स में-
1. टाइगर श्रॉफ के लिए कोई भले न कहे कि नाच न जाने आंगन टेढ़ा मगर 'मुन्ना माइकल' लिखने वाले पर आपको पूरा संदेह होगा कि क्या उसे लेखन के गुर पता हैं?
2. अनाथ बच्चे को पाल-पोस कर बड़ा करने वाले अकेले शराबी पिता के सत्तर-अस्सी के दशक वाले फार्मूले से फिल्म 1995 में शुरू होती है। आप हैरान होते है कि 21 की उम्र में किशोर से दिखने वाले मुन्ना माइकल का चेहरा पलक झपकते कैसे युवा टाइगर श्रॉफ में बदल गया?
3. बचपन से युवावस्था तक मुन्ना के रोल वाले ऐक्टरों की बेहद खराब कंटीन्यूटी से फिल्म शुरू होती है और फिर इसमें संतुलन नहीं दिखता।
4. माइकल जैक्सन को श्रद्धांजलि देने का दावा करने वाली फिल्म एमजे के फैंस को भी पसंद नहीं आएगी।
5. टाइगर के फैन्स फिल्म को देख कर उनसे दूरी महसूस करेंगे। हर फिल्म में झगड़ा, मारपीट और डांस करने वाले टाइगर को अब कुछ नया करने की जरूरत है। उनकी हर फिल्म एक जैसी दिखती है।
6. निधि अग्रवाल डेब्यू फिल्म में खूबसूरत दिखी हैं। ऐक्टिंग का टैलेंट शायद आने वाली फिल्मों में दिखे।
7. नवाजुद्दीन सिद्दिकी अपनी अभिनय प्रतिभा के बल पर किरदार को निभा तो ले जाते हैं परंतु महेंदर के रोल में वह पूरी तरह मिसफिट हैं। इसे आप उनके अब तक के करिअर के सबसे हास्यास्पद रोल में गिन सकते हैं।
8. शब्बीर खान का निर्देशन ढीला है और दूसरे हिस्से में कहानी तथा फिल्म समेत वह खुद फिसल गए हैं। 'मुन्ना माइकल' का कैमरा वर्क और दृश्य संयोजन बहुत खराब है।
9. संगीत और गाने आपको कहीं से ऐसी फिल्म के नहीं लगते, जिसमें कहानी डांस के इर्द-गिर्द घूमती है। वक्त काटने के लिहाज से भी फिल्म भारी है।
10. यह ऐसी फिल्म है जिसे टीवी पर चैनल बदल-बदल कर कभी देख लिया तो देख लिया। नहीं देखा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।