फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

The Elephant Whisperers: पांच साल में 450 घंटे हुई शूटिंग, इसके बाद बनी 39 मिनट की डॉक्यूमेंट्री

Tue, 14 Mar 2023 08:23 AM IST
प्रियंका नेगी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के पास बना थेप्पाकडू हाथी शिविर जहां इस डॉक्यूमेंट्री को फिल्माया गया असल में कार्तिकी के घर से महज आधे घंटे की दूरी पर है।
विज्ञापन
Oscars 2023- the elephant whisperers - फोटो : Agency
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ऊटी में पैदा हुईं और पली बढ़ीं कार्तिकी ने बचपन से ही अपने आस-पास हाथियों को देखा। हाथियों पर होने वाले अत्याचार उन्हें व्यथित करते थे। वह हमेशा चाहती थीं कि हाथियों का संरक्षण हो। मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के पास बना थेप्पाकडू हाथी शिविर जहां इस डॉक्यूमेंट्री को फिल्माया गया असल में कार्तिकी के घर से महज आधे घंटे की दूरी पर है। 2017 में जब रघु (हाथी) को रेस्क्यू कर लाया गया था, तो उसे जंगली कुत्तों ने बुरी तरह जख्मी कर दिया था। वह महज तीन माह का था। उसकी मां को बिजली का झटका देकर मारा गया था। 

कार्तिकी ने सुनाई आंखों देखी

कार्तिकी बताती हैं कि वह असल में कुछ दोस्तों के साथ मुदुमलाई टाइगर रिजर्व घूमने गईं, जहां उन्होंने देखा कि बोमन (कट्टूनायकन समुदाय पुजारी) एक हाथी के बच्चे को बचाने के लिए वैसी ही कोशिशें कर रहे थे, जैसे कोई पिता अपने बच्चे का जीवन बचाने के लिए करता। डिस्कवरी और एनिमल प्लैनेट के लिए फोटोग्राफी कर चुकीं कार्तिकी ने इसके बाद पांच वर्ष तक लगातार रघु, बोमन और उनकी पत्नी बेली के बीच के रिश्ते को आकार लेते हुए देखा। 

ऐसे बनी थी यह डॉक्यूमेंट्री

फिल्म के नायक बोमन हाथियों की सेवा करने वाले कट्टूनायकन समुदाय के पुजारी हैं। कार्तिकी ने करीब पांच साल इन परंपराओं, आदर्शों और इंसान व हाथियों के बीच के भावनात्मक रिश्ते के सफर को 450 घंटों की फुटेज में कैद किया। आखिर में सितंबर 2022 में गुनीत मोंगा के सहयोग से उनका यह सफर 39 मिनट की डॉक्यूमेंट्री में तब्दील होकर नेटफ्लिक्स पर सबके सामने आया। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें