सपोर्टिंग रोल में मिली पहचान, नेशनल अवॉर्ड तक जीता
सुरेश ओबेरॉय की भी फिल्मों में हीरो बनने की ख्वाहिश थी। लेकिन करियर के शुरुआत में जो ऑफर मिले, उसमें उन्होंने सहायक किरदार ही निभाए। साल 1977 में फिल्म 'जीवन मुक्त' से उन्होंने अपना करियर शुरू किया। आगे चलकर ‘काला पत्थर’, ‘सुरक्षा’, ‘कर्तव्य’, ‘लावरिस’ और ‘कुली’, ‘शराबी’ और ‘मिर्च मसाला’ जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल किया। उन्हें 'मिर्च मसाला(1985)' फिल्म के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। सुरेश ओबेरॉय ने बतौर एक्टर ही काम नहीं किया, वह एक जाने-माने डब आर्टिस्ट भी हैं, उन्होंने ‘द लायन किंग’ और ‘द मम्मी’ के लिए अपनी दमदार आवाज दी है।
फिल्मों से लिया ब्रेक और चले अध्यात्म की राह
सुरेश ओबेरॉय ने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया। लेकिन साल 2009 के बाद से उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना कम कर दिया। साल 2009 में फिल्म 'वर्ल्ड कप' की, साल 2019 में फिल्म 'मणिकर्णिका' में अभिनय किया। साल 2023 में वह रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘एनिमल’ में नजर आए। दो साल से उन्होंने कोई फिल्म नहीं की है। फिल्मों से दूरी बनाने का असल कारण उनका अध्यात्म की राह पर चलना है। वह बतौर मोटिवेशनल स्पीकर ब्रह्मा कुमारी की सिस्टर शिवानी वर्मा के साथ जुड़े हैं। ओबेरॉय उनके वर्ल्ड साइकियाट्रिक एसोसिएशन के गुडविल एंबेसडर हैं।
पिता सुरेश ओबेरॉय के साथ विवेक ओबेरॉय
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
बेटा विवेक ओबेरॉय बढ़ा रहा है अभिनय की विरासत को आगे
सुरेश ओबेरॉय ने 1 अगस्त 1974 को यशोधरा नाम की महिला से मद्रास में शादी की थी। सुरेश और यशोधरा के दो बच्चे हैं। एक का नाम है, मेघना और दूसरे का नाम है विवेक। एक्टर विवेक ओबेरॉय ही सुरेश ओबेरॉय के बेटे हैं। वह अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। विवेक ने भी बॉलीवुड में अपने लिए एक अलग जगह बना रखी है।
सुरेश ओबेरॉय से जुड़ी कुछ बातें
- एक्टिंग के अलावा सुरेश ओबेराॅय ने राजनीति में भी कदम रखा है। वह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं।
- एक्टिंग और डबिंग के अलावा सुरेश ओबेरॉय सिंगिंग का हुनर भी रखते हैं। वह एक राइटर भी हैं। उन्होंने एक कविता की किताब भी लिखी है।