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क्षेत्रीय फिल्मों को ऐसे बढ़ावा दे रहा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, प्रकाश जावड़ेकर ने दी जानकारी

Fri, 21 Jun 2019 10:18 PM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय - फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा क्षेत्रीय फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी लोकसभा को लिखित रूप में दी। बता दें कि सूचना प्रसारण मंत्रालय ने 2016 में 12-18 अगस्त के बीच भारत की आजादी को लेकर '70 साल आजादी, याद करो कुर्बानी' प्रोग्राम शुरू किया था। इसका आयोजन दिल्ली के सिरी फोर्ट ऑडिटोरियम में किया गया था।

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हर साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया के लिए फिल्मों का चयन होता है। इनमें कुल 47 फिल्मों को चुना जाता है जिसमें से 26 फीचर फिल्म और 21 नॉन फीचर फिल्म होती हैं। इन फिल्मों के चयन के लिए हर भाषा की फिल्म को महत्व दिया जाता है। चयनित फिल्मों को न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतराष्ट्रीय मंच पर भी प्रस्तुत किया जाता है।

मंत्रालय हर साल नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का भी आयोजन करती है, जिसकी तहत हिंदी सहित क्षेत्रीय भाषाओं की बेहतरीन फिल्मों को सम्मानित किया जाता है। इसके साथ ही जिन फिल्मों का चयन नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए होता है, उन फिल्मों को न सिर्फ देश के अन्य प्रतियोगिताओं बल्कि अंतराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में भी भेजा जाता है। जिसका आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय करता है।
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वहीं ब्रिक्स फिल्म फेस्टिवल में भी देश से चुनी हुई बेहतरीन फिल्मों को भेजा जाता है। बता दें कि ब्रिक्स (BRICS) में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। वहीं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय उन भारतीय फिल्मों की आर्थिक मदद भी करता है जो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इनमें ऑस्कर, टोरेंटो, बुसान ,बर्लिन आदि फिल्म फेस्टिवल शामिल हैं।

हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जिन फिल्मों की मदद की गई है उनमें न्यूटन और लोकतक लयरिंबी (Loktak Lairembee) शामिल हैं। फिल्म का सिलेक्शन बर्लिन फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ था।

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