कोई पांच साल पहले इंडिया टूडे के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोनी कपूर ने अपनी प्रेम कहानी कुछ यूं बताई थी, 'जब मैंने श्रीदेवी की पहली बार पर्दे पर देखा तो मुझे पर्दे पर तभी उससे एक तरह से प्यार हो गया था। मैंने उन्हें 70 के दशक में तमिल फिल्म में देखा था और उनसे मिलने चेन्नई चला गया कि फिल्म में साइन कर लेता हूं।'
'लेकिन वो उस समय चेन्नई में नहीं थीं। फिर मैने उन्हें 'सोलवां सावन' में देखा। मेरे जहन में वे कभी गई नहीं। आखिरकर मैंने उन्हें 'मिस्टर इंडिया' में साइन किया। तब उनकी मां उनके फैसला लिया करती थी। मैं श्रीदेवी को साइन करने उनकी माँ से मिलने गया। तब श्रीदेवी सबसे महंगी अभिनेत्री थीं। उनकी माँ ने मुझे 10 लाख की फीस रखी -शायद मुझे टरकाने के लिए। मैंने कहा मैं 11 लाख दूँगा।'
'उनकी मां से मेरी दोस्ती हो गई और मैं सेट पर उनके लिए हर चीज तैयार रखता था-बेहतरीन मेकअप रूम, बेहतरीन कपडे। दरअसल मुझे उनसे प्यार हो गया था। उन दिनों वो 'चांदनी' के लिए शूट कर रही थीं। मैं बहाने से स्विट्जरलैंड जाता था ताकि उनसे मिल सकूं। ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा। मैंने पूरी कोशिश की उन्हें जताने की कि मैं हर कदम पर उनके साथ हूँ। धीरे-धीरे श्रीदेवी को समझ में आया कि मैं वाकई उनसे प्यार करता हूँ।'
श्रीदेवी की मां की बीमारी
कहा जाता है कि श्रीदेवी की मां की बीमारी और फिर उनकी मौत के दौरान दोनों की नजदीकियां बढी थीं। जयप्रकाश चौकसे कहते हैं, 'श्रीदेवी की माँ बीमार थीं, उन्हें ब्रेन सर्जरी करवाना था। जब बोनी कपूर को पता चला तो वो चेन्नई चले गए। डॉक्टर की सलाह पर श्रीदेवी की माँ को सर्जरी के लिए अमरीका ले जाया गया। पूरे ट्रिप में बोनी कपूर उनके साथ थे। पर डॉक्टरों ने श्रीदेवी की मां की गलत सर्जरी कर दी।'
'श्रीदेवी ने अस्पताल पर मुकदमा किया और आखिर में हॉस्पिटल से सेटलमेंट हुआ और उन्हें मुआवजे के तौर पर 16 करोड रुपये मिले थे। इस नाजुक घड़ी में बोनी कपूर किस तरह से उनकी मां और उनकी सेवा कर रहे थे, वो श्रीदेवी ने देखा। श्रीदेवी के पिता का निधन पहले ही हो चुका था और वो अपनी माँ के करीब थीं।'
'माँ के निधन के बाद उन्हें सांत्वना देने के लिए हर समय उनके पास रहने वाले बोनी कपूर ही थे। इस तरह उनका रिश्ता सहानभूति से शुरू हुआ और प्रेम में बदल गया।'
बोनी कपूर के साथ श्रीदेवी ने मिस्टर इंडिया, रूप की रानी चोरों का राजा, मॉम जैसी फिल्में की हैं। हालांकि ये रिश्ता आसान नहीं था क्योंकि बोनी कपूर की शादी हो चुकी थी और उनके दो बच्चे भी थे। इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था।
लेकिन 90 के दशक में श्रीदेवी और बोनी कपूर ने शादी कर ली। दोनों की पारिवारिक पृष्ठभूमियां भी काफी अलग थीं। एक ओर जहां श्रीदेवी दक्षिण भारत से आई थीं तो बोनी कपूर का परिवार पंजाबी था।
जयप्रकाश चौकसे बताते हैं, 'शादी के बाद श्रीदेवी ने पंजाबी रीति-रिवाज सीखे। अपने आप को पंजाबी परिवार में ढालने कोशिश की। श्रीदेवी ने कभी भी बोनी कपूर को दक्षिण भारतीय रीति-रिवाज में ढलने को नहीं कहा। श्रीदेवी बोनी कपूर के परिवार मतलब उनके भाई और भाइयों के बच्चों के प्रति समर्पित थीं।'
'अपने ससुर सुरिंदर कपूर के 75वें जन्मदिन के लिए चेन्नई में उन्होंने बहुत बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया था। चन्नई के बंगले पर यज्ञ पूजा हुई, पार्टी रखी गई। इस पार्टी में कमल हासन और रजनीकांत मेहमानों को बतौर होस्ट मिले और स्नैक्स सर्व करते दिखे क्यूंकि वे श्रीदेवी का बहुत आदर करते थे।'
श्रीदेवी अपनी सेहत को लेकर बहुत ही सचेत रहती थीं और बोनी कपूर जो अपनी सेहत को लेकर लापरवाह थे, उनसे अक्सर इस मुद्दे पर बहस करती थीं।