CPR का मतलब Cardiopulmonary Resuscitation (रिससिएशन कार्डियोपल्मोनरी ) यह एक प्राथमिक चिकित्सा है। जब कोई सांस लेने में असमर्थ हो जाए , बेहोश जो जाए या कार्डियक अरेस्ट आ जाए तब सबसे पहले और समय पर सीपीआर से ही आप किसी की भी जान बचा सकते है। इसे संजीवनी क्रिया भी कहते है। जब कभी किसे बिजली का झटका लग जाए , दम घुटने पर , या पानी में डूबने पर , कई बार हमें CPR से मदत मिल सकती है।
सबसे पहले क्या करे ?
- यदि मरीज को दिल का दौर पड़ा है तो आप घबराए नहीं और पूरा धैर्य रखे।
- सबसे पहले अस्पताल को सूचित करें की आप हार्ट अटैक के मरीज को लेकर आने वाले है।
- मरीज को आराम से बिठाये और उसे रिलेक्स करें।
- मरीज के कपड़ों को ढीला कर दे।
- अगर मरीज को पहले से ही दिल की बीमारी की समस्या है और वो कोई दवाएं लेता हो , तो पहले उसे वो दवा दे।
- यदि मरीज को होश नहीं आ रहा हो तो उसे जमीन पर लेटा दें। दिल की धड़कने बंद हो गयी हो या साँस नहीं चल रही हो तो CPR (Cardiopulmonary Resuscitation ) प्रक्रिया अपनाए।
CPR में प्रमुख दो कार्य किए जाते है।
1 ) मुंह के द्वारा साँस देना
2 ) छाती को दबाना
दरअसल CPR में हम श्वसन क्रिया और रक्तभिसरण क्रिया को हम जारी रखते है। यदि मरीज को श्वास नहीं मिले तो 3- 4 मिनटों में मस्तिष्क के पेशी मृत होना शुरू हो जाते है। अगर 10 मिनट तक हम मरीज को कृत्रिम सांस न दे पाएं, तो मरीज के बचने चांस बहुत कम हो जाते है।
हार्ट अटैक में अचानक ही हृदय की किसी मांसपेशी में खून का संचार रुक जाता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय में खून का संचार बंद कर देता है। हार्ट अटैक के वक्त भी हृदय बाकी शरीर के हिस्सों में खून का संचार करता है और व्यक्ति होश में रहता है, लेकिन कार्डियक अरेस्ट में सांस नहीं आती और व्यक्ति के कोमा में जाने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि हार्ट अटैक के मरीज को कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक रहता है।
क्यों आता है कार्डियक अरेस्ट
जब रक्त में फाइब्रिनोजन की मात्रा ज्यादा हो जाती है हृदय में रक्त का संचार रुक जाता है। रक्त के फाइब्रिनोजन की अधिक मात्रा के कारण हृदय की गति असामान्य हो जाती है।
इलेक्ट्रिक शॉक है इलाज
अगर कोई कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित है तो उसे इलेक्ट्रिक शॉक ही बचा सकते है। जिस डिवाइस से इलेक्ट्रिक शॉक दिए जाते है उसे डिफिब्रिलेटर कहते है और कार्डियक अरेस्ट के मरीज की ये आखिरी उम्मीद होती है।