अमरीका में प्रैक्टिस कर रहे सीनियर डॉक्टर सौरभ बंसल ने बताया, 'ये काफी दुखद है। किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की होगी।' 'दरअसल, कार्डिएक अरेस्ट हर मौत का अंतिम बिंदु कहा जा सकता है। इसका मतलब है दिल की धड़कन बंद हो जाना और यही मौत का कारण है।'
लेकिन इसकी वजह क्या होती है?
डॉक्टर बंसल बताते हैं, 'इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं। आम तौर पर इसकी वजह दिल का बडा दौरा पड़ना हो सकता है। हालांकि बात ये भी है कि 54 साल की उम्र में आम तौर पर जानलेवा दिल का दौरा पडने का खतरा कम रहता है। उन्हें दूसरी मेडिकल दिक्कतें पहले से भी रही हो सकती हैं, लेकिन जाहिर है इसके बारे में हम लोग नहीं जानते।'
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के अनुसार दिल में इलेक्ट्रिकल सिग्नल की दिक्कतें शरीर में जब रक्त नहीं पहुंचाती तो वो कार्डिएक अरेस्ट की शक्ल ले लेता है। जब इंसान का शरीर रक्त को पम्प करना बंद कर देता है तो दिमाग में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसा होने पर इंसान बेहोश हो जाता है और सांस आना बंद होने लगता है।
क्या कोई लक्षण दिखते हैं?
सबसे बडी मुश्किल ये है कि कार्डिएक अरेस्ट आने से पहले इसके कोई लक्षण नहीं दिखते। यही वजह है कि कार्डिएक अरेस्ट की सूरत में मौत होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इसकी सबसे आम वजह असाधारण हार्ट रिदम बताई जाती है जिसे विज्ञान की भाषा में वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन कहा जाता है। दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधियां इतनी ज्यादा बिगड़ जाती हैं कि वो धड़कना बंद कर देता है और एक तरह से कांपने लगता है।
कार्डिएक अरेस्ट की कई वजहें हो सकती हैं, लेकिन दिल से जुड़ी कुछ बीमारियां इसकी आशंका बढ़ा देती हैं। वो ये हैं-
- कोरोनरी हार्ट की बीमारी
- हार्ट अटैक
- कार्डियोमायोपैथी
- कॉनजेनिटल हार्ट की बीमारी
- हार्ट वाल्व में परेशानी
- हार्ट मसल में इनफ्लेमेशन
- लॉन्ग क्यूटी सिंड्रोम जैसे डिसऑर्डर
इसके अलावा कुछ दूसरे कारण हैं, जो कार्डिएक अरेस्ट को बुलावा दे सकते हैं, जैसे-
- बिजली का झटका लगना
- जरूरत से ज्यादा ड्रग्स लेना
- हैमरेज जिसमें खून का काफी नुकसान हो जाता है
- पानी में डूबना
लेकिन क्या कार्डिएक अरेस्ट से रिकवर किया जा सकता है?
जी हां, कई बार छाती के जरिए इलेक्ट्रिक शॉक देने से इससे रिकवर किया जा सकता है। इसके लिए डिफिब्रिलेटर नामक टूल इस्तेमाल होता है। ये आम तौर पर सभी बडे अस्पतालों में पाया जाता है। इसमें मुख्य मशीन और शॉक देने के बेस होते हैं, जिन्हें छाती से लगाकर अरेस्ट से बचाने की कोशिश होती है।
लेकिन दिक्कत ये है कि अगर कार्डिएक अरेस्ट आने की सूरत में आसपास डिफिब्रिलेटर न हो तो क्या किया जाए?
जवाब है, CPR। इसका मतबल है कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन। इसमें दोनों हाथों को सीधा रखते हुए मरीज की छाती पर जोर से दबाव दिया जाता है। इसमें मुंह के जरिए हवा भी पहुंचाई जाती है।
हार्ट अटैक से कैसे अलग?
ज्यादातर लोग कार्डिएक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही मान लेते हैं। लेकिन ये सच नहीं है। दोनों में खासा फर्क है। हार्ट अटैक में तब आता है जब कोरोनरी आर्टिरी में थक्का जमने की वजह से दिल की मांसपेशियों तक खून जाने के रास्ते में खलल पैदा हो जाए। इसमें छाती में तेज दर्द होता है। हालांकि, कई बार लक्षण कमजोर होते हैं, लेकिन दिल को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी साबित होते हैं। इसमें दिल शरीर के बाकी हिस्सों में खून पहुंचाना जारी रखता है और मरीज होश में रह सकता है।
लेकिन जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है, उसे कार्डिएक अरेस्ट का खतरा बढ़ जाता है। और कार्डिएक अरेस्ट में दिल तुरंत आधार पर खून पहुंचाना बंद कर देता है। यही वजह है कि इसका शिकार होने पर व्यक्ति अचानक बेहोश होता है और सांस भी बंद हो जाती है।
वजह क्या हो सकती है?
डॉक्टर बंसल के मुताबिक, 'कार्डिएक अरेस्ट का मतलब है दिल की धड़कन का बंद होना। और हार्ट अटैक के मायने हैं दिल को पर्याप्त मात्रा में खून न मिलना।'
'हां, ये जरूर है कि खून न मिलने की वजह से कार्डिएक अरेस्ट हो जाए। ऐसे में हार्ट अटैक इसकी कई वजहों में से एक है। एक खून का थक्का कार्डिएक अरेस्ट की वजह बन सकता है। दिल के आसपास होने वाला फ्लूइड इसका कारण बन सकता है। दिल के भीतर किसी तरह के इंफेक्शन से भी कार्डिएक अरेस्ट हो सकता है। इसके अलावा भी कई वजह हो सकती हैं।'
दुबई में डॉक्टरों ने इस बात का पता लगाया होगा या लगा रहे होंगे कि श्रीदेवी को कार्डिएक अरेस्ट क्यों हुआ। शायद उन्हें अब तक इसकी वजह पता भी चल गई हो।'
हार्ट अटैक में आर्टिरी का रास्ता रुकने से ऑक्सीजन वाला खून दिल के एक खास हिस्से तक नहीं पहुंचता। अगर इसका रास्ता तुरंत आधार पर नहीं खोला जाता तो उसके जरिए दिल के जिस हिस्से तक खून पहुंचता है, उसे काफी नुकसान होना शुरू हो जाता है।
हार्ट अटैक के मामले में इलाज मिलने में जितनी देर होगी, दिल और शरीर को उतना ज्यादा नुकसान होता जाएगा। इसमें लक्षण तुरंत भी दिख सकते हैं और कुछ देर में भी। इसके अलावा हार्ट अटैक आने के कुछ घंटों या कुछ दिनों बाद तक इसका असर देखने को मिल सकता है।
सडन कार्डिएक अरेस्ट से अलग हार्ट अटैक में दिल की धडकन बंद नहीं होती। इसलिए कार्डिएक अरेस्ट की तुलना हार्ट अटैक में मरीज को बचाए जाने की संभावना कहीं ज्यादा होती हैं।
दिल से जुड़ी ये दोनों बीमारियां आपस में गहरी जुड़ी हैं। दिक्कत ये भी है कि हार्ट अटैक के दौरान और उसकी रिकवरी के दौरान भी कार्डिएक अरेस्ट आ सकता है। ऐसा जरूरी नहीं कि हार्ट अटैक आने पर अरेस्ट हो ही जाए, लेकिन आशंका जरूर रहती है।
मौत की कितनी बडी वजह?
NCBI के मुताबिक कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां दुनिया में करीब 1।7 करोड़ सालाना मौत के लिए जिम्मेदार है। ये कुल मौतों का 30 फीसदी है। विकासशील देशों की बात करें तो ये एचआईवी, मलेरिया और टीबी की संयुक्त मौतों से दोगुनी मौत के लिए जिम्मेदार है।
एक अनुमान के मुताबिक दिल की बीमारियों से होने वाली मौतों में सडन कार्डिएक अरेस्ट से होने वाली मौतों की हिस्सेदारी 40-50 फीसदी है। दुनिया भर में कार्डिएक अरेस्ट से बचने की दर एक फीसदी से भी कम है और अमरीका में ये करीब 5 फीसदी है।
दुनिया भर में कार्डिएक अरेस्ट से होने वाली मौत इस बात का संकेत है कि इसकी जानलेवा क्षमता से बचना आसान नहीं है। इसके लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर भी काम किया जा रहा है। कार्डिएक अरेस्ट से रिकवर करने में मदद करने वाले टूल आसानी से उपलब्ध नहीं हैं और विकासशील देशों में हालात और खराब हैं।