मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां एक तरफ छात्र संगठन एसएफआई ने फिल्म ‘72 हूरें’ को जेएनयू कैंपस में दिखाए जाने की निंदा की। वहीं कुछ छात्रों में फिल्म की तारीफ की। फिल्म को लेकर छात्रों की मिली जुली राय देखने को मिली है। कुछ छात्रों ने इसे प्रोपेगेंडा बताया तो कुछ ने कहा कि फिल्म ‘72 हूरें’ के नाम पर आतंकवाद फैलाने वाली मानसिकता के खिलाफ है। कई छात्रों ने कहा कि समाज में टकराव पैदा करने के लिए इस फिल्म का निर्माण किया गया है।
कुछ राजनीतिक दलों ने फिल्म ’72 हूरें’ में दिखाए गये आतंकवादियों को मानसिक रूप से बरगलाने के दृश्यों पर गहरी आपत्ति जताई है। इन राजनीतिक दलों का कहना है कि फिल्म में पेश की गयी इस तरह की नकारात्मक बातों से धर्म विशेष को लेकर लोगों में गलत संदेश जाएगा और इससे सामाजिक ताने-बाने को उलटा असर पड़ेगा। मौलाना साजिद राशिद ने फिल्म '72 हूरें' पर आपत्ति उठाते हुए उसपर धार्मिक सीख का गलत ढंग से चित्रण करने का आरोप लगाया है।
बता दें कि सिनेमाघरों में 7 जुलाई को रिलीज होने जा रही इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर वाद प्रतिवाद जारी है और इस बीच फिल्म के जेएनयू परिसर में स्क्रीनिंग ने फिर से इस फिल्म को सुर्खियों में ला दिया है। फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त निर्देशक संजय पूरन सिंह चौहान ने किया है।
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