जीएलए विश्वविद्यालय मथुरा (उ.प्र.) का छठवां दीक्षांत समारोह अत्यन्त गरिमा एवं उल्लास के साथ बुधवार को सम्पन्न हुआ। दीक्षांत समारोह में स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की कुल 12 गोल्ड और 12 सिल्वर मेडलिस्ट के साथ 2815 उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा 16 छात्रों को मेरिट सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।
समारोह का शुभारम्भ मुख्य अतिथि ब्रहमोस एयरोस्पेस के संस्थापक तथा इसरो के डिस्टींग्यूस्ड प्रोफेसर पदमभूषण ए.एस. पिल्लई, कुलाधिपति श्री नारायणदास अग्रवाल एवं कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने माँ सरस्वती एवं प्रेरणास्त्रोत श्री गणेशीलाल अग्रवाल जी के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरूआत शैक्षिक शोभायात्रा के आगमन से हुई, जिसमें मुख्य अतिथि, कुलाधिपति, कुलपति, प्रतिकुलपति एवं कुलसचिव के साथ विश्वविद्यालय के कोर्ट, एग्जीक्यूटिव काउंसिल एवं एकेडमिक काउंसिल के सदस्य की अगवानी मुख्य सभागार में हुई। तत्पश्चात् कुलाधिपति ने दीक्षांत समारोह के प्रारम्भ की उद्घोशणा की।
समारोह में मुख्य अतिथि ब्रहमोस एयरोस्पेस के संस्थापक तथा इसरो के डिस्टींग्यूस्ड प्रोफेसर पदमभूषण ए.एस. पिल्लई जी ने दीक्षांत संबोधन की शुरुआत सभी उपाधि प्राप्त करने वाले नवस्नातकों का उत्साहवर्धन, सभी शिक्षकों एवं छात्रों को बधाई देते हुए की।
मुख्य अतिथि पदमभूषण ए.एस. पिल्लई
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पदमभूषण ए.एस. पिल्लई को जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि प्रदान की गई। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलसचिव अशोक कुमार सिंह ने सभी का स्वागत किया। प्रतिकुलपति प्रो. ए.एम. अग्रवाल ने मुख्य अतिथि का परिचय प्रस्तुत किया।
कुलपति प्रो. डी.एस. चैहान द्वारा विश्वविद्यालय की प्रगति के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। समारोह के अन्त में धन्यवाद ज्ञापन निदेशक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता के द्वारा दिया गया, उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपस्थित गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
समारोह के समापन अवसर पर कुलाधिपति श्री नारायणदास अग्रवाल एवं कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने मुख्य अतिथि पदमभूषण ए.एस. पिल्लई को स्मृति चिन्ह् भेंट कर सम्मानित किया। प्रतिकुलपति प्रो. आनंद मोहन अग्रवाल ने कुलाधिपति श्री नारायणदास अग्रवाल को स्मृति चिन्ह् भेंट किया। तत्पश्चात् कुलाधिपति द्वारा दीक्षांत समारोह के सम्पन्न होने की उद्घोषणा की गयी एवं शैक्षिक शोभायात्रा के प्रस्थान से कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र्र जैसी है सुपरसोनिक ब्रह्मोस: डॉ. पिल्लई
ब्रहमोस एयरोस्पेस के संस्थापक तथा इसरो के डिस्टींग्यूस्ड प्रोफेसर और डीआरडीओ के मुख्य नियंत्रक पदमभूषण ए एस पिल्लई ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रहमोस प्रथम और द्वितीय भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र की तरह क्षमतावान है। क्योंकि सुपरसोनिक ब्रहमोस प्रथम पुनः उपयोग करने योग्य मिसाइल है। उन्होंने कू्रज मिसाइल ब्रहमोस द्वितीय के बारे में बताया कि यह दुश्मन को तहस-नहस कर पुनः सुदर्शन चक्र की तरह उपयोग हेतु वापस लौट सकती है।
उन्होंने महर्षि पतंजलि के योगासूत्र का उल्लेख करते छात्र-छात्राओं को अपने जीवन में सुखः समृद्धि के साथ जीवन व्यतीत करते हुए कहा कि ‘आप भारत के निर्माता हैं‘ आपको महान उद्देश्य रचनात्मकता कठिन परिश्रम जैसे गुणों के साथ राष्ट्र प्रेम को अपने जीवन में उतारना चाहिए, जो आपको और आपके राष्ट्र को महान बनायेगा। इससे पूर्व मनुष्यी एक आश्चर्यजनक प्राणी तकनीकी क्रांति स्पेस, खोज, ‘नेटवर्किंग, विद एकेडमी टू कॉम्बेट एमटीसीआर‘ जैसे बिन्दुओं पर गहनता से विचार रखकर छात्रों को प्रोत्साहित किया।
मनुष्य एक आश्चर्यजनक प्राणी बिन्दु पर बोलते हुए कहा कि मनुश्य सम्पूर्ण ब्रहमांड में जैव विकास के बाद भगवान की सर्वोत्तम कृति है। जो 13.7 बिलियन वर्शों बाद अस्तित्व में आयी, जबकि 5 बिलियन वर्शों में सौर तंत्र (सोलार सिस्टम) का विकास हुआ मनुष्य का मस्तिष्क बहुत आश्चर्यजनक होता है। ये विशिष्ट प्रकार की 86 बिलियन न्यूरॉन्स से बनता है। खास रूचिपूर्ण तथ्य ये भी है कि मनुष्य की 5000 पीड़ियां पृथ्वी पर पैदा हो चुकी हैं।
आचार्य भट्ट जो जीनियस गणितज्ञ थे
उन्होंने आचार्य भारद्वाज वर्श 800 बीसी के बारे में बताया कि वे एवीएशन टेक्नोलॉजी और स्पेस क्राफ्ट के बारे में अपना दृष्टिकोण रखते थे। यहां तक कि वे एक दूसरे ग्रहों तक यात्रा भी करते थे। आचार्य कणाद ने 600 बीसी में सबसे पहले परमाणु का सिद्धांत खोजा भास्कराचार्य ने न्यूटन से 500 वर्ष पूर्व ही बीजगणित से लोगों को परिचित कराया। आचार्य भट्ट जो जीनियस गणितज्ञ थे उन्होंने 500 एडी पूर्व ही घोषणा कर दी थी कि पृथ्वी गोल है जो अपने अक्ष पर घूमती है। आज की सूचना तकनीकी वाइनरी नंबर पर निर्भर करती है, जिसकी खोज का योगदान भारत ने किया था।
देखिये छठवें दीक्षांत समारोह की कुछ ख़ास झलकियां अमरउजाला की नज़र से।