इस साल बॉलीवुड की कई बड़ी हस्तियों के पुत्र-पुत्रियां बॉलीवुड में दस्तक देने वाले हैं। इनमें सबसे पहला नाम है शिव दर्शन का। शिव निर्माता-निर्देशक सुनील दर्शन के बेटे हैं। वह शुक्रवार को फिल्म 'करले प्यार करले' से टिकट खिड़की पर दस्तक देने जा रहे हैं।
आम तौर पर बॉलीवुड के दिग्गज अपने बेटे-बेटी के साथ जमा हुआ सितारा लेकर आते हैं। लेकिन आपके साथ ऐसा नहीं है। फिल्म में हसलीन कौर नई हीरोइन है। क्या कहेंगे?
हमने फिल्म इस सोच के साथ नहीं बनाई कि मैं बड़े डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सुनील दर्शन का बेटा हूं। पिताजी ने मुझे और हसलीन को ठीक उसी तरह से लॉन्च किया है, जैसे उन्होंने अन्य तमाम नए ऐक्टरों को मौके दिए। जहां तक हसलीन की बात है, वह नई जरूर हैं लेकिन उन्होंने कमाल का काम किया है। उनके किरदार में कोई नया चेहरा ही अच्छा लगता।
आपकी पहली फिल्म है, इस लिहाज से यह काम कितना मुश्किल था?
मैं बचपन से फिल्मी माहौल में रहा हूं, इसलिए मेरे लिए यह कोई बहुत नई चीज नहीं थी। लेकिन हां, शुरुआत में आपको आत्मविश्वास तो बटोरना ही पड़ता है। वैसे मेरे सामने हसलीन के रूप में एक बढ़िया ऐक्टर थी। अगर सामने वाला ऐक्टर अच्छा हो तो आपका काम आसान हो जाता है। इस फिल्म में यही हुआ।
आपको परिवार में फिल्मी माहौल मिला तो क्या यह माना जाए कि बचपन से ही आप ऐक्टर बनने का सपना देखते थे?
ऐसा नहीं है। मैं इस बारे में नहीं सोचता था। लेकिन पापा की एक फिल्म थी 'तलाश'। इसके एक सीन की शूटिंग के दौरान इसके एक लीड ऐक्टर नहीं पहुंचे। उनका सीन शूट होना था। हालांकि उस सीन में ऐक्टर का चेहरा नहीं दिखाया जाना था। तब पापा ने मुझे बुलाया।
मुझे हीरो के कपड़े पहनाए गए, मेकअप किया गया। फिर सीन शूट हुआ। जब मैंने यह देखा कि ऐक्टर की सब लोग कितनी खातिरदारी करते हैं तो मेरे मन में भी ऐक्टर बनने का सपना पैदा हो गया। लेकिन ऐक्टर बनना आसान नहीं था और पापा को भी मेरे इस ड्रीम के बारे में पता नहीं था।
आपने कब पिता से कहा कि आपको हीरो बनना है?
मैंने पापा से यह बात कभी नहीं कही। मुझे लगता है कि यह तो तय था कि पापा जब डायरेक्टर-प्रोड्यूसर हैं तो मैं हीरो बनूंगा।
पता चला है कि टीन-एज में आप काफी मोटे थे!
हां, यह सही है। मैं बहुत मोटा था। करीना कपूर ने मुझसे कहा था कि तुम्हें हर हाल में जिम जाना चाहिए। उनकी बात का मुझ पर असर हुआ और मैंने वेट कंट्रोल करना शुरू कर दिया। जिम जाने लगा।
फिल्म में आपके किरदार के बारे में बताएं...।
फिल्म में मेरा नाम है कबीर। कबीर कॉलेज में पढ़ता है और बहुत निडर है। मोटर बाइक उसका पैशन है। उसे स्टंट करना अच्छा लगता है। वह दूसरों के चैलेंज खूब मजे में स्वीकार करता है। प्रीत (हसलीन कौर) हर बात में उससे मुकाबला करना चाहती है। इस तरह से यह फिल्म दोनों के एक-दूसरे को बात-बात में चैलेंज करने और प्यार करने की कहानी है।
इस रोल के लिए खुद को कितना तैयार करना पड़ा?
ईमानदारी से कहूं तो अलग से कोई बहुत ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ी। सच तो यह है कि ऐक्टर बनने की मेरी तैयारी कई सालों से थी। हां, 'करले प्यार करले' की स्क्रिप्ट तैयार होने के बाद मैंने रोल के लिए कुछ रिहर्सल की।
डांस के लिए अतिरिक्त प्रेक्टिस की। पर्दे पर आप मेरे कैरेक्टर में जो बातें देखेंगे, वह आज के युवाओं में आपको दिखाई देंगी।
आपके पिता डायरेक्टर हैं मगर उन्होंने आपकी पहली फिल्म को निर्देशित नहीं किया। इससे कहीं आपके मन में फिल्म को लेकर कोई शंका है?
बिल्कुल नहीं। आपको बताऊं कि निर्देशक के रूप में राजेश पांडे की भी यह पहली फिल्म है। वे पिछले कई वर्षों से पापा के सहायक रहे हैं। उन्हें मैं पिछले कई साल से जानता हूं और उनके साथ पूरी तरह कंफर्टेबल हूं। मेरे हिसाब से मेरे जैसे नए हीरो के लिए यह फिल्म पर्फेक्ट लॉन्चिंग पैड है।
इसमें ऐक्शन है, डांस है, इमोशंस हैं। एक नया हीरो अपने बारे में दर्शकों को जो कुछ बताना चाहता है, वह इस फिल्म में पूरी तरह मौजूद है।