दुनिया भर में रोमांस के बादशाह के तौर पर मशहूर शाहरुख खान का ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय लिखने वाले कबीर की धरती काशी में पहली बार आना यहां सावन के सोमवार का एक उत्सव हो गया। इस उत्सव के बीच शाहरुख ने अमर उजाला की संपादकीय टीम के साथ एक्सक्लूसिव संवाद किया और इस संवाद के दौरान कहा कि उन्होंने बहुत नाम कमा लिया, बहुत पैसा कमा लिया, लेकिन अब वह इस दौड़ से बाहर निकलकर कुछ ऐसा कर रहे हैं, जिसे उनके बच्चे उनकी विरासत के तौर पर सहेज सकें और अपने पिता को एक अच्छे इंसान के तौर पर हमेशा याद रख सकें।
फिल्मों में एक अच्छे बेटे, एक अच्छे दोस्त, एक अच्छे प्रेमी, एक अच्छे पिता और एक अच्छे कोच के किरदारों पर बात शुरू करते हुए शाहरुख ने कहा कि मुझे ये सब संस्कार में मिला। उन्होंने कहा, ‘मैं अभी यहां कमरे से निकला तो भीतर टीवी पर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ चल रही थी। इसका हीरो राज अच्छी बातें करता है। मुझे लगता है कि ये हमारे देश की परंपरा है। हमें अच्छी चीजें अच्छी लगती ही हैं। अपनी आने वाली फिल्म 'हैरी मेट सेजल' के किरदार का हवाला देते हुए उन्होंने ये भी जोड़ा कि हम कई बार खुद अपने बारे में गलत धारणाएं बना लेते हैं।
कबीर के दोहे, पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ...की बात चलने पर शाहरुख ने हाल ही में हुई अपनी टेड टॉक का जिक्र करते हुए कहा कि किसी किस्म का प्रेम हो, प्रेम अच्छी बात है। लेकिन चाहे बात रिश्तों की हो या अच्छी जगहों की। हर चीज का एक वक्त होता है। इश्क का भी एक वक्त होता है। इसी तरह हर जगह का भी एक वक्त होता है। अच्छी जगहों पर हम चाहकर भी नहीं जा पाते क्योंकि ऐसी जगहें हमें खुद बुलाती हैं।
'अब भी मेरे भीतर कुछ है जो अधूरा है'
शाहरुख खान
- फोटो : अमर उजाला
थिएटर और सिनेमा के बीच की तुलना से जुड़े सवाल पर शाहरुख ने कहा कि थिएटर की जो सीख है, वो सिनेमा से कभी हासिल नहीं हो सकती है। मेरा अब भी ये मानना है कि सिनेमा में लोग दिल लेकर नहीं आते। इसका मतलब ये नहीं कि मेरी आने वाली फिल्म कोई बिना दिमाग की फिल्म है लेकिन थिएटर के लोगों में थोड़ा गुरूर आ ही जाता है। शायद इसीलिए लोग शुरू शुरू में मुझे एग्रेसिव भी समझते थे। अपनी बेटी का जिक्र करते हुए शाहरुख ने कहा कि सुहानी की ऐक्टिंग में दिलचस्पी है। लेकिन मैंने उससे कहा है कि पहले पांच साल सिर्फ थिएटर करो।
मनोरंजक सिनेमा के साथ साथ कथानकपरक सिनेमा के सवाल पर शाहरुख बोले, ‘जब भी मैं एक एंटरटेनिंग फिल्म बनाऊंगा, उसके बाद एक गाढ़ी फिल्म जरूर बनाऊंगा। मैं बाकी लोगों से भी कहता रहता हूं कि जब तक आप दर्शकों को अच्छा सिनेमा दिखाओगे नहीं, ये कहना बेमानी है कि लोगों को अच्छा सिनेमा समझ नहीं आता।
अमर उजाला के इस सवाल पर कि इतना सब कुछ पा लेने के बाद भी क्या कोई हसरत शाहरुख की अधूरी रह गई है? रोमांस के इस राजा ने बहुत ही सूफियाने अंदाज में अपना एक सबसे बड़ा राज अमर उजाला के साथ साझा किया। उन्होंने कहा, ‘अब भी मेरे भीतर कुछ है जो अधूरा है। मैं 15-20 घंटे अभी सिर्फ एक्टिंग में लगा देता हूं। पर अब मुझे एहसास होने लगा है कि सब कुछ मिल जाने के बाद भी मैं होड़ में लगा हुआ हूं। मुझे इससे निजात लेनी है। वो सब करना है। जो हर मां बाप चाहेगा कि उनके बच्चे भी करें। पिछले तीन साल से मैंने एक ऐसा काम शुरू किया है जिससे मुझे आत्मिक शांति मिल रही है। अब मैं कह सकता हूं कि मेरे पास एक ऐसी विरासत है जिसे संभालते वक्त मेरे बच्चों को मेरे ऊपर एक पिता के तौर ज्यादा नाज होगा। हर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बेटे कुछ अच्छा करें। तो मैंने अब जो ये काम शुरू किया है, इससे मुझे बहुत सुकून मिल रहा है। इस काम का फिल्मी दुनिया से कोई लेना देना नहीं है। मैं ये भी चाहता हूं कि मेरे बच्चों को मुझसे अच्छी शिक्षा मिले क्योंकि मेरे परिवार में पढ़ाई को शुरू से बहुत अहमियत दी गई। मुझे ये कहने में आज कोई झिझक नहीं कि मेरे टैलेंट से ज्यादा मेरी पढ़ाई मेरे काम आई।'