सीरीज 'परफेक्ट फैमिली'
- फोटो : इंस्टाग्राम@pankajtripathi
बच्चे वही सीखते हैं, जो वो देखते हैं
मनोज पाहवा का कहना है कि बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं और जिस माहौल में वे बड़े होते हैं। पेरेंटिंग की मुख्य समस्या यह है कि हम बच्चों को क्या सिखाते हैं और हमारे काम क्या होते हैं। हमारी बातों और कामों में जो अंतर होता है, उससे ज्यादातर मामलों में बच्चे कन्फ्यूज हो जाते हैं।
हम सभी ऐसी फैमिली से आते हैं, जिनमें कुछ न कुछ कमियां होती हैं और यह सीरीज दिखाती है कि माता-पिता बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है। एक परफेक्ट फैमिली की इमेज बनाए रखने के दबाव के बारे में बात करते हुए सीमा ने कहा कि जब किसी चीज पर कोई ठप्पा लग जाता है, तो इससे हम पर बहुत दबाव पड़ता है।
फैमिली को परफेक्ट बनाने का कोई फॉर्मूला नहीं है। हम खुद पर काम कर सकते हैं और एक बेहतर फैमिली बनाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
आज की पीढ़ी के पिता अपने बच्चों की बात सुनते हैं
सीरीज में सोमनाथ का पारंपरिक पिता वाला किरदार निभाने के बाद, मनोज पाहवा ने इस बात पर विचार किया कि पीढ़ियों के साथ पिता बनने का तरीका कैसे बदला है। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के पिता अपने बच्चों की बात सुनने लगे हैं और उन्हें काफी स्पेस भी देते हैं। हमारी पीढ़ी में हम शायद ही अपने पिता से बात करते थे, लेकिन अब यह बदल गया है और अच्छे के लिए बदला है।
पुरानी पीढ़ी की एक खूबी जो मुझे पसंद थी, वह यह थी कि पिता अपने बच्चों के बारे में सब कुछ जानते थे, उनके दोस्त कौन हैं और वे किसके साथ घूमते-फिरते हैं। अफसोस की बात है कि आज की तेज-तर्रार जिंदगी में उनके पास देने के लिए इतना समय नहीं है।
सीरीज 'परफेक्ट फैमिली'
- फोटो : इंस्टाग्राम@pankajtripathi