फिल्म इंडस्ट्री क्या संजय दत्त से बेगानी हो चली है। कोई उनकी स्थिति क्यों नहीं समझना चाहता।
संजय दत्त के दिन अच्छे नहीं चल रहे। यह दुनिया जानती है। जेल की सजा काटने के दौरान पहले उनकी और फिर घर पर पत्नी मान्यता की तबीयत खराब हो गई। संजय पैरोल पर बाहर हैं तो कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं। संजय की पिछली दो फिल्में ‘जंजीर’ और ‘पुलिसगिरी’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लॉप हो गईं। सो उनका मार्केट ठंडा हो गया।
अब बताया जा रहा है कि उनकी अधूरी फिल्मों के निर्माता परेशान हैं। कुछ की शूटिंग बाकी है तो किसी की डबिंग। सूत्रों के अनुसार निर्माताओं को लग रहा है कि संजय जेल से पैरोल पर बाहर आने के बावजूद उनका काम पूरा नहीं कर रहे, जबकि सबको पता है कि वह पिछले कई दिनों से सिर्फ पत्नी की देखभाल में लगे हैं। उनके दो छोटे-छोटे बच्चे भी है।
उल्लेखनीय है कि संजय के जेल चले जाने से ‘पी.के.’, ‘उंगली’ और ‘शेर’ जैसी फिल्मों का काम बीच में लटक गया था। निर्माता समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें। पैरोल पर बाहर आए संजय से ऐसे में काम करने को भी नहीं कहा जा सकता जबकि उनकी पत्नी बीमार है।
लेकिन सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों ‘पी.के’ के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा और निर्देशक राजकुमार हिरानी संजय से मिले और आग्रह किया कि किसी तरह समय निकाल कर उनकी फिल्म की डबिंग कर दें। फिल्म उनके लिए ही रुकी हुई है।
असल में इस फिल्म की शूटिंग के वक्त सिंक साउंड तकनीक के द्वारा कलाकरों के डायलॉग भी रेकॉर्ड कर लिए गए थे। लेकिन संजय दत्त को माइक लगा कर ऐक्टिंग करने में मुश्किल होती थी, अतः उन्होंने बाद में डबिंग की बात कही थी। परंतु हालात बदल गए।
बताया जाता है कि फिल्म ‘उंगली’ में भी संजय का काम पूरा हो चुका है और उसकी भी केवल डबिंग बाकी है। सूत्रों का कहना है कि ‘पुलिसगिरी’ के निर्माताओं ने तो संजय की सजा की घोषणा होते ही उनके घर में ही डबिंग स्टूडियो बना दिया था, जिससे उनका काम पूरा हो गया।
अब देखना होगा कि ‘पी.के.’ और ‘उंगली’ के निर्माता क्या करते हैं? वैसे इधर संजय दत्त ने एक बार फिर पत्नी की सेहत को देखते हुए एक महीने पैरोल बढ़ाने की अर्जी दी है। देखें, क्या फैसला आता है!