अमर उजाला संवाद 2025 का आगाज हो चुका है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में गुरुवार को इस दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में पहले दिन मशहूर शायर अजहर इकबाल ने शिरकत की।
इस दौरान थिएटर आर्टिस्ट और अभिनेत्री जूही बब्बर भी उनके साथ पैनल डिस्कशन में शामिल रहीं जिसका विषय था 'आधुनिक युग और कला की दुनिया'। संवाद के मंच पर अजहर ने पहली बार अपने नाम बदलने का दिलचस्प किस्सा भी साझा किया।
'जिंदगी के सारे कथानक बदल जाएंगे...
रोम के सारे मानक बदल जाएंगे।
दर्द के गीत बजते रहेंगे यूं ही...
गाने वाले अचानक बदल जाएंगे।
अमर उजाला संवाद के सेशन की शुरुआत अजहर इकबाल ने अपनी इस शायरी से की। इस दौरान अजहर से पूछा गया कि गूगल पर जब आपके बारे में कुछ सर्च किया जाता है तो आपकी शेरों-शायरी, वाहवाही-दाद के अलावा भी एक और चीज मिलती है, वो है एक नाम- मोहम्मद अजहरुद्दीन। तो आप अजहर इकबाल हैं या मोहम्मद अजहरुद्दीन?
अजहर के नाम बदलने का दिलचस्प किस्सा
इस सवाल पर अजहर थोड़ा मुस्कुराए और पुरानी यादों में खोते हुए एक दिलचस्प किस्सा निकाल लाए, जो था उनके नाम बदलने का किस्सा। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है, जब इस तरह का सवाल मेरे सामने आया है। सवाल का जवाब देते हुए अजहर ने एक किस्सा सुनाया।
उन्होंने कहा, 'हुआ यूं था कि मेरे वालिद साहब ने मेरा नाम अजहर इकबाल ही रखा था, लेकिन जब में 10वीं कक्षा में था और बोर्ड के एग्जाम होने वाले थे। उस वक्त मेरे ऊपर क्रिकेट का जुनून सवार था और उस वक्त मोहम्मद अजहरुद्दीन इंडियन टीम के कैप्टन हुआ करते थे तो जैसे ही 10वीं का रजिस्ट्रेशन फॉर्म आया तो मैंने अजहर इकबाल की जगह मोहम्मद अजहरुद्दीन लिख दिया।
अब 30 से 35 साल हो गए हैं इस नाम से जूझते हुए और अब मैंने तय किया है कि अमर उजाला में विज्ञप्ति दूंगा कि मैंने अपना नाम मोहम्मद अजहरुद्दीन से बदलकर अजहर इकबाल कर लिया है।'
जिंदगी के हालात पर बोले अजहर
वहीं कार्यक्रम में जब अजहर से पूछा गया कि एक बहुत अच्छी बात आपने लिखी है कि जिन्होंने आपको नाम दिया और जिस नाम को आपने बदला, उन्हें आपने नहीं बताया कि आपने जिंदगी को किस तरह बदल डाला?
इस पर अजहर इकबाल ने कहा, 'जो चीजें हम हासिल करते हैं, उसके एवज में हम कई चीजें खो भी देते हैं। आपने जो सवाल किया वह बहुत ही भावुक करने वाला है। जिंदगी की शुरुआत बहुत संघर्ष से हुई थी। वालिद की छोटी सी दुकान थी। तब हालात वैसे नहीं थे कि हम उन्हें अच्छी जिंदगी दे पाएं। कभी-कभी चीजों को समझने में हम देर कर देते हैं।'