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हिंदी बोलने वालों को नहीं भाते शाहरुख, आंकड़ें हैं गवाह

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हिंदी सिनेमा के सर्वाधिक दर्शक उत्तर भारत में हैं। जो यहां के फैन्स के दिलों पर राज करता है वही असली सितारा होता है। बॉलीवुड के टॉप तीन सितारों में शामिल शाहरुख बॉक्स ऑफिस पर बड़ी चुनौती का सामना करते हुए आज दिलवाले ला रहे हैं। नॉर्थ में सफलता के बगैर वह कामयाबी की इबारत नहीं लिख सकेंगे। जानिए, क्या कहते हैं उनके बारे में उत्तर भारत के आंकड़े।
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सिनेमा की दुनिया शाहरुख खान को भले ही बादशाह या किंग खान कहे लेकिन उत्तर भारत में उनकी स्थिति सलमान और आमिर के मुकाबले कमजोर है। बॉक्स ऑफिस आंकड़ों से साफ पता चलता है कि दिल्ली-यूपी सर्किट में शाहरुख का क्रेज दूसरी जगहों की तुलना में कम है। नतीजा यह कि शाहरुख की फिल्मों का टिकट खिड़की कलेक्शन दूसरे खानों की अपेक्षा यहां कम रहता है।

साथ ही फिल्मों के देश भर के कलेक्शन में दिल्ली-यूपी जहां 20 फीसदी का योगदान देते हैं, वहीं शाहरुख की फिल्म के लिए यह योगदान 16 फीसदी तक गिर जाता है। ये आंकड़े शाहरुख की आज रिलीज हो रही फिल्म दिलवाले के लिए चिंताजनक हैं क्योंकि उसका मुकाबला एक और बड़ी फिल्म बाजीराव मस्तानी है।
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दिल्ली-यूपी में क्यों पिछड़ जाते हैं शाहरुख

शाहरुख की दिल्ली-यूपी सर्किट में अब तक सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्में चेन्नई एक्सप्रेस और हैप्पी न्यू ईयर हैं। मगर इनकी कुल कमाई में इस सर्किट का औसत बीस से कम है। चेन्नई एक्सप्रेस का ऑल इंडिया व्यवसाय 210 करोड़ रुपये था और इसमें दिल्ली-यूपी का हिस्सा 33 करोड़ (18 प्रतिशत) था। जबकि हैप्पी न्यू ईयर में शाहरुख की दिल्ली-यूपी से कमाई और औसत दोनों कम हो गए। इसमें देश में 180 करोड़ रुपये के कारोबार में दिल्ली-यूपी का शेयर मात्र 29 करोड़ (16 प्रतिशत) था।

शाहरुख के मुकाबले सलमान और आमिर की फिल्मों में दिल्ली-यूपी का शेयर औसत 20 फीसदी के बराबर होता है। सलमान की बजरंगी भाईजान के देश में 320 करोड़ के बिजनेस में दिल्ली-यूपी की 64 करोड़ (20 फीसदी) और किक के 225 करोड़ के बिजनेस में 45 करोड़ (20 फीसदी) की हिस्सेदारी थी। इसी तरह आमिर की पीके के 330 करोड़ में 66 करोड़ (20 फीसदी) और थ्री इडियट्स के 200 करोड़ में 40 करोड़ (20 फीसदी) दिल्ली-यूपी के थे।

जानकार शाहरुख के यहां पिछड़ने का एक बड़ा कारण यह मानते हैं कि नॉर्थ में सलमान की मसाला फिल्में या आमिर की यूनिवर्सल अपील वाली फिल्में ज्यादा पसंद की जाती हैं, जबकि शाहरुख रोमांटिक फिल्में करते हैं। रोहित शेट्टी की चेन्नई ऐक्सप्रेस मसाला फिल्म थी इसलिए उसके कलेक्शन में दिल्ली-यूपी का योगदान शाहरुख की अन्य फिल्मों के औसत से बढ़ कर था।

सलमान है तीनों खानों में सबसे आगे

शाहरुख की फिल्मों को लेकर दिल्ली-यूपी सर्किट का एक रोचक तथ्य है कि शुरुआत तो उन्हें अच्छी मिल जाती है यानी वीकेंड या पहले हफ्ते में तो वे दर्शक बटोर लेती हैं लेकिन आगे जाकर कुल कलेक्शन घट जाता है। पिछले पांच-छह साल में शाहरुख की माई नेम इज खान, रा.वन, डॉन-2, जब तक है जान, चेन्नई एक्सप्रेस और हैप्पी न्यू ईयर रिलीज हुई। इन फिल्मों का औसत वीकेंड कलेक्श दिल्ली-यूपी में सवा 14 करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहा मगर पहले हफ्ते में यह औसतन 20 करोड़ से भी कम रह गया।

कमाई की रफ्तार क्रमशः घटने से शाहरुख का कुल कारोबार यहां कम रहा। उनकी पिछली छह फिल्मों ने दिल्ली-यूपी में कुल 163 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया। जबकि आमिर की पांच फिल्मों ने इससे ज्यादा लगभग 170 करोड़ रुपये कमाए। कुल कमाई के मामले में दिल्ली-यूपी सर्किट में सलमान सबसे आगे हैं।

उन्होंने पांच साल में यहां से लगभग 324 करोड़ रुपये का बिजनेस किया। हालांकि उनकी इस दौरान एक दर्जन फिल्में रिलीज हुई। दिल्ली-यूपी से औसत कमाई में भी शाहरुख आमिर पिछड़े हुए हैं। आमिर की पांच फिल्मों से औसत कमाई जहां करीब 34 करोड़ रुपये है, वहीं शाहरुख और सलमान की 27 करोड़ रुपये है।
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शाहरुख के पास मास फैन फॉलोइंग कम!

जानकार मानते हैं कि शाहरुख के पास मास फैन फॉलोइंग कम है और रोमांटिक फिल्म देखने वाला एक खास वर्ग है। जो ज्यादातर पहले ही हफ्ते में फिल्म देख लेता है। नतीजा यह कि दूसरे हफ्ते से शाहरुख की फिल्म की कमाई में भारी गिरावट आ जाती है। बॉलीवुड की पहले हफ्ते में सर्वाधिक कमाई वाली टॉप पांच फिल्मों में शाहरुख की केवल चेन्नई एक्सप्रेस (पेड प्रिव्यू के साथ 151 करोड़ रुपये) आती है, जबकि सलमान-आमिर की दो-दो फिल्में हैं।

वहीं दूसरे हफ्ते की सर्वाधिक कमाई वाली फिल्मों में शाहरुख टॉप पांच में नहीं रह जाते। यहां पांचों स्थान पर सलमान-आमिर की फिल्म हैं। दूसरे हफ्ते की सर्वाधिक कमाई वाली टॉप 10 में शाहरुख की केवल चेन्नई एक्सप्रेस (करीब 42 रोड़ रुपये) है। जबकि इस सूची में सलमान-आमिर की तीन-तीन फिल्में हैं।

वास्तव में जहां सिनेमा के कारोबार में अब भी सिंगल स्क्रीन अहम हैं, वहां से शाहरुख की कमाई ज्यादा नहीं होती। उनकी फिल्मों का व्यवसाय मुंबई, गुड़गांव, कोलकाता, बंगलूरू और हैदराबाद से ज्यादा आता है क्योंकि यहां सिंगल स्क्रीन लगभग खत्म हो चुके हैं और मल्टीप्लेक्सों का राज है।
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