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Saira Banu: 'हमारे घर ईद एकता का उत्सव होता, दुनिया खूबसूरत लगती', ईद पर सायरा बानो को याद आए दिलीप साहब

Mon, 31 Mar 2025 12:58 PM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Saira Banu: सायरा बानो ने आज सोमवार को प्रशंसकों को ईद की बधाई दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ईद से जुड़ी यादें भी शेयर की हैं, जब वे साहब यानी दिलीप कुमार के साथ इस त्योहार को सेलिब्रेट किया करती थीं।
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सायरा बानो-दिलीप कुमार - फोटो : इंस्टाग्राम
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विस्तार
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कोई त्योहार हो या कोई और खास मौका, सायरा बानो दिलीप कुमार को जरूर याद करती हैं। आज सोमवार को ईद का जश्न मनाया जा रहा है। इस मौके पर सायरा बानो ने भी फैंस को मुबारकबाद दी है। साथ ही उन्होंने पुरानी यादें ताजा की हैं। सायरा बानो ने बताया कि दिलीप कुमार के साथ उनके घर ईद का त्योहार कैसे मनाया जाता था। उन्होंने लिखा, 'बेशक बरसों बीत गए, लेकिन ऐसी खूबसूरत यादें फीकी नहीं पड़तीं'।

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बचपन में कुछ ऐसी होती थी ईद
सायरा बानो ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उनके और दिलीप कुमार के इंटरव्यू के कुछ फुटेज हैं। इसके साथ सायरा बानो ने एक लंबा नोट लिखा है। उन्होंने लिखा है, 'जब मैं छोटी थी और रमजान का पाक महीना आता था, तो हमारा घर सिर्फ रोशनी की झिलमिलाहट से नहीं, बल्कि पूरी श्रद्धा से जगमगा उठता था। हवा में कुछ खास हुआ करता, एक सुकून जो रोजा रखने और प्रार्थनाओं से आता। फिर भी, दिलीप साहब से शादी के बाद ही ईद को अलग तरीके से देखना शुरू किया'।

शादी के बाद बदले त्योहार के मायने
सायरा बानो ने आगे लिखा है, 'हमारा घर जो सिर्फ हमारा था, वह एक ऐसी जगह बन गया, जहां प्यार, सद्भावना और एक-दूसरे के साथ प्यार भरी बॉन्डिंग हुआ करती। सुबह होते ही घर को बड़े प्यार से भेजे गए फूलों से सजाया जाता। और जैसे ही सुबह की पहली किरण आसमान में फैलती, संगीतकारों का एक ग्रुप हमारे दरवाजे पर इकट्ठा होता, उनके ढोल और बिगुल की धुन पाली हिल में शायद ही कोई अनदेखा कर पाता'।
 

'साहब के लिए प्यार से अनमोल कुछ न था'
सायरा बानो लिखती हैं, 'हमारे घर में किसी के लिए दीवार नहीं थीं, किसी के लिए दरवाजे बंद नहीं होते थे। फिल्म जगत के दोस्त, प्रशंसक और अजनबी एक के बाद एक आते रहते थे। साहब के लिए प्यार करने वाले लोगों की संगति से बढ़कर कोई खुशी नहीं थी, प्यार पाने और देने से ज्यादा कीमती कोई चीज उनके लिए नहीं थी। उनका मानना था कि एक आदमी की कीमत उसकी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उसके दिलों में होती है। और उन्होंने ऐसा सहजता से किया। साहब किसी भी चीज से ज्यादा मानवता में यकीन करते थे। वे अक्सर कहते थे कि एक इंसान दूसरे के जीवन को जिस तरह से प्रभावित कर सकता है, उसे बताया नहीं जा सकता। इसकी ताकत अलौकिक है। और वे इसी सिद्धांत पर जीते थे'। 

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ह'हम सभी एक-दूसरे के प्रति दयालु रहें'
अभिनेत्री ने आगे लिखा है, 'साहब के अंदर कई ऐसी खूबियां थीं जो मतभेदों को मिटाने, खाई को पाटने और उन लोगों को एकजुट करने की शक्ति रखती थीं, जिन्हें दुनिया ने अलग-अलग समझा था। और इसलिए, हमारे घर में ईद हमेशा एकता का उत्सव हुआ करता था। यह समय का एक ऐसा क्षण होता था, जब दुनिया, कुछ समय के लिए और अद्भुत रूप से, वैसी ही लगती थी, जैसी होनी चाहिए। दुनिया खूबसूरत लगती। बरसों बीत गए हैं, लेकिन यादें फीकी नहीं पड़तीं। वे आज भी ताजा हैं। काश कि हम सभी इंसानियत को समझें। एक-दूसरे के प्रति दयालु रहें। यही सबसे बड़ा उपहार है। बता दें कि 07 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार इस दुनिया को अलविदा कह गए।

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