मुझ पर भी लगे टैग, तोड़ने में लगे 23 साल और 60 फिल्में
योगेश की बात का जवाब देते हुए रितेश ने बताया कि मेहमान सिर्फ दर्शकों की सोच को दिखाते हैं और उसी सोच को घर के अंदर लाते हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘सोच या धारणा वैसी ही बनती है जैसा आप बाहर दिखाते हैं। हम सभी इस दौर से गुजरे हैं। जब मैंने अपनी पहली फिल्म की थी, तब मेरे पिता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे।
जब मैंने शुरुआत की, तो सब कहते थे, 'इनके पिता मुख्यमंत्री हैं, इसलिए इन्हें काम मिलता है और इसलिए इनकी फिल्में अच्छा करती हैं।' मैं भी इस दौर से गुजरा हूं। तेईस साल और 60 फिल्मों के बाद आज मैं उन सभी टैग्स को तोड़कर आपके सामने खड़ा हूं। कुछ ठप्पों को तोड़ने में समय और मेहनत लगती है, लेकिन अगर आप ठान लें, तो वे टूट ही जाते हैं।’
विलासराव देशमुख और रितेश देशमुख
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