अभिनेता अक्षय आनंद को हिंदी सिनेमा में देव आनंद की खोज माना जाता है। पुरखे उनके अंग्रेजों की फौज में रहे, पिता ने एटा में छावनी बसाई और उन्हें बचपन में नाम मिला जॉन गार्डनर। सिनेमा और टेलीविजन में अपने अब तक के सफर और अपनी इस यात्रा के कुछ रोचक किस्सों को अक्षय ने साझा किया पंकज शुक्ल के साथ इस खास बातचीत में।
आपके नाम के साथ जुड़े आनंद की क्या कहानी है? लोग समझते हैं कि ये नाम आपको देव आनंद ने दिया।
नहीं, यह नाम मुझे देव साहब ने नहीं दिया। मैंने जब देव आनंद के साथ पहली फिल्म हम नौजवान की तो उसमें मेरा नाम आता है, जॉनी गार्डनर। देव साहब ने मुझे लॉन्च किया, उसके बाद मैंने आनंद महेंद्रू के साथ एक धारावाहिक किया, इंद्रधनुष। ये तीस साल पहले की बात है। इस दौरान मुझे एक ऐसा नाम रखने की सलाह मिले जिसे भारतीय दर्शक अपना मान सकें। मैंने शर्त रखी कि मैं अपना हिंदी नाम तो रख लूंगा लेकिन मेरे नाम के पीछे आनंद जरूर होना चाहिए। मैंने अपना हिंदी नाम उस शख्स को समर्पित किया जिसने मेरे अंदर के हुनर को पहचाना, और मुझे एक अभिनेता के तौर पर दुनिया से परिचित कराया। उसी समय आनंद ने अपने भतीजे का नाम अक्षय रखा था जिसे उन्होंने मुझे भी दिया। मैंने कहा कि अक्षय आनंद थोड़ा जुबान को तकलीफ देने वाला नाम है। तो उन्होंने कहा कि जो नाम बोलते समय जुबान को तकलीफ देते हैं, वही असरदार होते हैं।