उस दौर में सुर्खियां तैयार रहती थीं, माफी से भी नहीं पड़ता था फर्क
रवीना ने खुलासा किया कि उस दौर में जो एक्टर्स एडिटर्स से अच्छे संबंध रखते थे या उनकी नजरोंं में अच्छे होते थे, उनके लिए तो सारी चीजें अच्छी रहती थीं। अगर कोई व्यक्ति एक प्राइवेट पर्सन होता था, तो उसे तो चैन से जीने तक की इजाजत नहीं थी।
उस समय सुर्खियां लोगों के दिमाग में बसी रहती थीं और अगर कोई अभिनेता माफी भी मांग लेता था, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता था। बस अगली खबर और एक छोटी सी माफी का इंतजार करना पड़ता था, जिसका कोई मतलब नहीं होता था। तो बस उस खबर से ही नुकसान हो चुका होता था। वह लोगों के दिमाग में बैठ जाती थी, जिसे ठीक करना नामुमकिन था।
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