मुझे ऑडिशन देने में कोई दिक्कत नहीं
इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा समय बिताने के बावजूद रासिका कहती हैं कि उन्होंने कभी भी ऑडिशन देने को अपने स्तर से नीचे नहीं समझा। मैंने हमेशा कहा है कि मैं ऑडिशन दूंगी।
पिछले कुछ साल में लोगों ने मुझसे ऐसा करने के लिए नहीं कहा है, लेकिन अगर वे कहते हैं, तो मुझे कोई परेशानी नहीं है। मैं खुशी-खुशी ऐसा करूंगी क्योंकि इससे मुझे और उन्हें उस रोल में मुझे देखने का मौका मिलता है। मुझे यह जानने का भी मौका मिलता है कि वे क्या चाहते हैं। तो यह दोनों के लिए फायदेमंद है। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।
खुशकिस्मत हूं की टाइपकास्ट नहीं हुई
रसिका का कहना है कि वह खुशकिस्मत रहीं कि एक ही तरह के किरदारों में बंधकर नहीं रह गईं। 'मिर्जापुर' में एक्टर्स को उनके किरदारों के नाम से जाना जाता है। लेकिन मैं लकी थी क्योंकि 'मंटो', 'मिर्जापुर' और 'दिल्ली क्राइम' लगभग एक ही समय पर रिलीज हुए थे।
'दिल्ली क्राइम' और 'मिर्जापुर' में बिल्कुल अलग-अलग किरदार थे। इसलिए मैं खुशकिस्मत थी कि मुझे उस विविधता को आजमाने और दिखाने का मौका मिला। दोनों ने अपने-अपने तरीके से बहुत अच्छा प्रदर्शन किया।
'दिल्ली क्राइम' एक बहुत ही शानदार शो है। रसिका ने माना कि टाइपकास्टिंग से बचना हमेशा उनकी प्राथमिकता नहीं थी। अपने करियर के शुरुआती कुछ साल में एक ही तरह के रोल में बंधे रहने की चिंता करने के बजाय काम मिलना ज्यादा जरूरी था।
करियर की शुरुआत में मैं सोचती थी, 'चलो स्टीरियोटाइप ही सही, लेकिन कम से कम काम तो मिलेगा।' मैं सच में यह नहीं सोच रही थी कि 'अगर मैं एक ही तरह के रोल में बंध गई तो क्या होगा?' मैं बस यही सोच रही थी कि 'मुझे बस काम करना है।'