संजय लीला भंसाली की फिल्म 'रामलीला' गहरे संकट में है। हो सकता है कि फिल्म की रिलीज ही टालनी पड़ जाए।
15 नवंबर को रिलीज होने वाली चर्चित फिल्म 'रामलीला' के लिए एक बार मुश्किल खड़ी हो गयी है। यह तीसरी बार है कि यह फिल्म अपने नाम की वजह से विवादों में है।
पहले दो बार यह फिल्म अपने नाम और पोस्टर को लेकर चर्चाओं में आई थी। इस बार लखनऊ में आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने 'रामलीला' के विरुद्ध सेंसर बोर्ड में याचिका दायर की है।
ठाकुर की याचिका में कहा गया है कि 'रामलीला' हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करती है। यह फिल्म भगवान राम के नाम पर परिहास करती है और उनके नाम के महत्व को कम करती है।
उन्होंने कहा कि संजय लीला भंसाली की फिल्म रामलीला का रामलीला के धार्मिक नाट्य मंचन से कोई वास्ता नहीं है। यह फिल्म अपने आप को गोलियों की रामलीला कहती है। इसके ट्रेलर में कई गंदे संवाद और अंतरंग दृश्य हैं जिनका इस शब्द से कोई संबंध नहीं है और जो हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करता है।
उन्होंने कहा है कि इस संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दायर की गयी थी पर अदालत ने कहा कि चूंकि अभी तक सेंसर बोर्ड ने इस पर निर्णय नहीं किया है। इसलिए इस पर सुनवाई अभी जल्दबाजी होगी।
इसलिए अमिताभ ने सेंसर बोर्ड से तत्काल इस फिल्म का नाम बदले जाने या ऐसा नहीं करने पर इसके प्रोमो को रोकने और फिल्म को अनुमति देने से मना करने का निवेदन किया है।