हॉरर फिल्मों को बनाने की टेक्निक अलग है
राम गोपाल वर्मा ने इंटरव्यू में बताया कि जब वह अलग-अलग हॉरर जॉनर की फिल्में बनाते हैं तो सबकी टेक्नीक अलग होती हैं। वह कहते हैं, ‘हॉरर फिल्में ज्यादा साइकोलॉजिकल होती हैं। ज्यादातर शॉटस मैं शूटिंग के पहले ही सोच लेता हूं। अगर फिल्म हॉरर है, तो कहानी ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर कहानी लंबी हुई तो डर नहीं लगेगा। फिल्म को शूट करने का अपना एक तरीका है। दर्शकों को यह पता रहना चाहिए कि अब डर लगने वाला है। इसी वजह से लोग ऐसी फिल्में देखते हैं।’