भरत शाह और नाजिम रिजवी को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
राम गोपाल वर्मा ने उस समय इंडस्ट्री के उस माहौल के बारे में भी बताया जहां, जबरन वसूली की धमकियां आम बात थीं। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री के एक कारोबारी को 5 करोड़ रुपए की फिरौती का कॉल आया। मदद के लिए वह भरत शाह के पास पहुंचा। कहा जाता है कि अंडरवर्ल्ड से बातचीत के बाद रकम घटाकर 2 करोड़ कर दी गई।
इसके बाद कई लोग ऐसे मामलों में शाह से मदद मांगने लगे। रामू ने आगे बताया कि भरत शाह को कोई पैसा नहीं मिल रहा था। वो बस मदद कर रहे थे। लेकिन पुलिस उनके फोन टैप कर रही थी। स्थिति बिगड़ने पर भरत शाह डर गए और सदमे में आ गए।
पुलिस ने सुझाव दिया कि शायद शकील आपके लिए काम कर रहा था। तो भरत शाह ने कहा, ‘वह मेरे लिए काम क्यों करेगा? मैं तो बस एक फिल्म निर्माता हूं।’ आखिरकार 2001 में भरत शाह और नाजिम रिजवी को गिरफ्तार कर लिया गया। भरत शाह को इस केस में सजा हुई, हालांकि वह ट्रायल के दौरान काफी समय जेल में बिता चुके थे।
आसान नहीं रही सलमान की फिल्म की रिलीज
निर्देशक ने आगे बताया कि ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ की रिलीज आसान नहीं रही। अंडरवर्ल्ड फंडिंग के शक में जांच एजेंसियों ने इसकी प्रिंट्स जब्त कर ली थीं, जिससे रिलीज टल गई थी। बाद में फिल्म रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक प्रदर्शन किया।
राम गोपाल वर्मा के इस खुलासे ने उस दौर की याद ताजा कर दी है, जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बताया जाता था। फिल्मों की फंडिंग से कास्टिंग और उगाही तक, कई मामलों में गैंगस्टर्स के हस्तक्षेप की बातें सामने आती रही हैं।