दोनों फिल्मों के क्लैश को बताया 'क्रूर' सांस्कृतिक टकराव
रामगोपाल वर्मा ने आज रविवार को अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक लंबा नोट लिखा है। इसका सार यह है कि दोनों फिल्मों के क्लैश की उन्होंने आलोचना की है। वहीं, आदित्य धर फिल्म्स के बैनर तले बनी 'धुरंधर 2' का उन्होंने सपोर्ट किया है। 'टॉक्सिक' और 'धुरंधर 2' की बॉक्स ऑफिस टक्कर को उन्होंने साउथ बनाम हिंदी नहीं, बल्कि दो संस्कृतियों के बीच 'क्रूर' क्लैश कहा है। उन्होंने लिखा है, 'धुरोक्सिक पार्क (Dhuroxic PARK)! नहीं, मैं 19 मार्च को रिलीज होने वाली दो बड़ी फिल्मों 'धुरंधर 2' और 'टॉक्सिक' की बात नहीं कर रहा हूं। मैं असल में एक ऐसे पुराने जमाने की बात कर रहा हूं, जिसे पहले कभी नहीं देखा या अनुभव किया गया, जो इंडियन सिनेमाघरों के बड़े मैदान में धमाका कर रहा है। यह डेविड और गोलियत के बीच की लड़ाई है'।
बोले- 'यह इलाकों का नहीं, सिनेमा का टकराव है'
रामगोपाल वर्मा आगे लिखते हैं, 'फिल्म 'KGF 2' के गोलियत जैसे कलेक्शन अचानक 'धुरंधर' के गोलियत कलेक्शन के सामने एक छोटे डेविड जैसे लगने लगे। लेकिन अब उस गोलियत का सीक्वल 'धुरंधर 2' नया डेविड है, जो 'टॉक्सिक' को घूर रहा है। डेविड और गोलियत। मेरा पक्का मानना है कि 'Dhuroxic' नॉर्थ बनाम साउथ या बॉलीवुड बनाम सैंडलवुड के बारे में नहीं है। असल में यह दो कल्चर के बीच एक 'क्रूर' टकराव है। यह टकराव इलाकों का नहीं, बल्कि सिनेमा का है। दोनों के बीच मुख्य फर्क यह है कि 'धुरंधर' दर्शकों की समझदारी का सम्मान करता है और 'टॉक्सिक' उन्हें बेवकूफ मानता है।
फिल्म 'केजीएफ 2' को कहा 'लोकल'
निर्देशक ने आगे लिखा है,' फिल्म KGF 2 एक लोकल फिल्म थी, जिसका मकसद आम लोगों की बेवकूफी थी और 'धुरंधर' का मकसद आम लोगों की समझदारी थी। इसी वजह से यह ग्लोबल बनी। 'धुरंधर', एक रिपोर्ट के मुताबिक 130 करोड़ की डेविड फिल्म (दोनों वर्जन मिलाकर लगभग 260 करोड़) ने लगभग 1500 करोड़ कमाए, जिससे यह साबित होता है कि कथित आम लोग असल में मसाला व्यापारियों की सोच से कहीं ज्यादा समझदार हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि आदित्य धर फिल्म्स ने कभी नहीं सोचा कि दर्शक बेवकूफ हैं, लेकिन फिल्म रिलीज होने के बाद लोगों ने जोरदार, जमीन हिला देने वाली आवाज में जवाब दिया, 'हां, हम सच में इतने समझदार हैं। यह गौर करने के लिए शुक्रिया'। उन्होंने आगे लिखा है, 'तो 19 मार्च को जब दुनियाभर के थिएटर्स की लाइटें बंद होंगी, तो दो डेविड और दो गोलियथ एक लड़ाई लड़ेंगे। यह लड़ाई इन 10 क्रूर सच्चाइयों के बीच होगी। जो इस तरह हैं
- 1. बिना सोचे-समझे हीरो की पूजा बनाम दर्शक खुद कहानी में अपने नैतिक कामों से हीरो खोजते हैं।
- 2. ग्रैविटी को चुनौती देने वाले स्टंट जो फिजिक्स का मजाक उड़ाते हैं और हर उस स्कूली बच्चे का अपमान करते हैं जिसने न्यूटन पढ़ा है, बनाम 'धुरंधर' का एक्शन इतना रॉ और असली है कि कोई भी सच में मुक्कों को महसूस कर सकता है।
- 3. बैकग्राउंड स्कोर जो हर पांच मिनट में चिल्लाते हैं, 'ताली बजाओ और सीटी बजाओ, बेवकूफों' बनाम पूरी तरह से चुप्पी जो शानदार परफॉर्मेंस से बोलती है।
- 4. एक आदमी को भगवान जैसा दिखाने के लिए 700 करोड़ का खर्च बनाम 'धुरंधर' के हर किरदार को इंसान जैसा महसूस कराने के लिए 130 करोड़ रुपये का खर्च।
- 5. दर्शकों को बेवकूफों जैसा समझना, जिन्हें ताली बजानी पड़ती है, बनाम दर्शकों के साथ बड़ों जैसा बर्ताव करना जो एक मुश्किल कहानी को खुद समझ सकते हैं।
- 6. अल्ट्रा स्लो मोशन हीरो एंट्री शॉट्स और शैम्पू के एड से सीधे उड़ते बाल, बनाम ठंडी, कैलकुलेटिव इंटेलिजेंस जो असल में देखने वाले को चुनौती देती है।
- 7. इंडियन सिनेमा को बड़े पैमाने पर हीरो की पूजा की रस्म में बदलना, बनाम वह सिनेमा जो आम लोगों के दिमाग में छिपी इंटेलिजेंस को बाहर निकालता है।
- 8. क्रिएटिव वैक्यूम को छिपाने के लिए VFX की आतिशबाजी, आंखों को खराब करने वाले सेट और सितारों पर उड़ाए गए बजट बनाम 'धुरंधर' में हर एक रुपया डूब जाने वाले इमोशंस बनाने पर खर्च किया गया जो हमेशा आपके साथ रहते हैं।
- 9. एक ऐसी फिल्म जो दर्शकों से इसका मजा लेने के लिए अपना दिमाग बंद करने की गुजारिश करती है बनाम एक ऐसी फिल्म जो आपको हर फ्रेम पर सोचने और सवाल करने पर मजबूर करती है।
- 10. पैसा बहाया जा रहा है बनाम पैसा इस्तेमाल किया जा रहा है।
आखिर में दिया यह डिस्क्लेमर
रामगोपाल वर्मा ने पोस्ट के आखिर में एक डिस्क्लेमर दिया है। वे लिखते हैं, 'नहीं! यह मेरा आदित्य धर फिल्म्स के लिए प्यार नहीं है, जिसकी वजह से मुझे यह लिखना पड़ा, बल्कि यह इंडियन सिनेमा के लिए मेरी उम्मीद है। मैं 19 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। यह जानने के लिए कि इंडिया 'धुरंधर' है या 'टॉक्सिक'।