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Movie Review: हल्के-फुल्के कॉमिक अंदाज में लुभाती 'बहन होगी तेरी'

Sun, 11 Jun 2017 07:41 AM IST
रवि बुले
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'बहन होगी तेरी' फिल्म
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निर्माताः टोनी डिसूजा, नितिन उपाध्याय
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निर्देशकः अजय पन्नालाल

सितारेः राजकुमार राव, श्रुति हासन

रेटिंग: **

अपने मूल आइडिया में यह रोचक फिल्म है। स्कूल में छात्र प्रतिज्ञा की यह पंक्ति अक्सर किशोरों को खटकती है कि 'हम सब भारतवासी आपस में भाई-बहन 'हैं। खयाल आता है कि सब कैसे भाई-बहन? एक को तो छोड़ना होगा। कच्ची उम्र में डर सताता है कि रक्षाबंधन पर गली-मोहल्ले या स्कूल की वह लड़की राखी न बांध दे, जिसे देख कर कुछ-कुछ होता है।

थोड़े क्रिकेट और थोड़े रोमांस के बीच लखनऊ में रहने वाले गट्टू (राजकुमार राव) की भी यही हालत है। गली में सामने रहने वाली बचपन से साथ खेली, बड़ी हुई बिन्नी (श्रुति हासन) के लिए उसका दिल धड़कता है मगर गली-परिवार वालों को लगता है कि मोहल्ले की लड़की तो गट्टू की बहन जैसी है। जब तक गट्टू इजहार-ए-मोहब्बत करे बिन्नी से सगाई के लिए एनआरआई दूल्हा मौजूद हो जाता है। गट्टू को दोस्त का सहारा मिलता है मगर कैसे? क्या मोहब्बत ऐसे अंजाम तक पहुंच पाती है जहां रोना न आए?
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राजकुमार के कंधों पर टिकी है फिल्म

'बहन होगी तेरी' फिल्म
अपनी पहली फिल्म के साथ आए निर्देशक अजय पन्नालाल अगर मूल आइडिया पर टिके रहते तो फिल्म बांधे रहती। परंतु दूसरे हिस्से में उन्होंने कुछ और छोटी-छोटी कहानियों को पिरोने की कोशिश की है। लंबा खींचने के चक्कर में दूसरे हिस्से में फिल्म ढीली हो जाती है। इसके बावजूद अगर आप हल्के-फुल्के कॉमिक रोमांस और चुटीली बातों से आनंदित हो सकते हैं तो 'बहन होगी तेरी' मनोरंजन करेगी।

छोटे शहरों में प्यार के इजहार की सकुचाहट के कुछ पल इसमें खूबसूरती से उभरकर आए हैं। फिल्म राजकुमार राव के कंधों पर है। उन्होंने बेहतरीन अभिनय से इसे खूब संभाला है। गंभीर फिल्में करने वाले राजकुमार साधारण लड़के लगे हैं और मासूमियत के साथ उनकी घबराहट भी अच्छी लगती है।

फिल्म को और बेहतर बनाने के लिए अच्छी अभिनेत्री की दरकार थी। इस मामले में श्रुति हासन खरी नहीं उतरतीं और कमजोर कड़ी बन जाती हैं। पंजाबी कुड़ी बनने के लिए श्रुति अतिरिक्त कोशिश करती हैं। बात बन नहीं पाती। निर्देशक ने लखनऊ को खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है और फिल्म के संपादन में कसावट है। रंजीत, गुलशन ग्रोवर, दर्शन जरीवाला, हैरी टेंगरी ने अपनी भूमिकाएं बखूबी निभाई हैं। संगीत बेहतर होता तो फिल्म को फायदा मिलता।
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