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क्या उम्मीदों पर खरी उतर पाई है पीके?

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निर्देशक राजकुमार हिरानी की पीके का निर्माण भले ही रुक-रुक कर हुआ, लेकिन शुक्रवार को रिलीज के साथ इसने रफ्तार पकड़ ली। देश-विदेश के 5500 से ज्यादा छोटे-बड़े स्क्रीन में फिल्म दिखाई जा रही है। पहले दिन फिल्म के शो हाउसफुल रहे। पहले दिन 70 से 80 फीसदी आक्यूपेंसी रही।
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उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के बावजूद दिल्ली-नोएडा में दर्शक पीके को देखने पहुंचे। राजस्थान, नागपुर, रायपुर, इंदौर, पुणे, कोलकाता में अच्छी ओपनिंग मिली। आमिर ने फिल्म में भोजपुरी बोली है। इस कारण यूपी-बिहार में कामकाजी दिन होने के बावजूद बड़ी संख्या में फिल्म ने दर्शक बटोरे। मुंबई का कलेक्शन सबसे अच्छा रहा। बीते सोमवार से एडवांड बुकिंग शुरू हो गई थी।

हिरानी की तीसरी हिट फिल्म

रोचक तथ्य यह है कि ठीक 11 साल पहले 19 दिसंबर को ही हिरानी की पहली फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस रिलीज हुई थी। पीके से पहले हिरानी तीन हिट फिल्में बना चुके थे, परंतु यह फिल्म बनाना आसान नहीं रहा।

दिसंबर 2009 में थ्री इडियट्स रिलीज हुई थी और उसके पांच साल बाद पीके रिलीज हुई है। पीके में इतनी देरी नहीं होती, परंतु स्क्रिप्ट को लेकर बाधाएं आती गईं और फिल्म में विलंब होता गया।  हिरानी और अभिजात जोशी ने मिलकर स्क्रिप्ट लिखी है।

पहली तीन फिल्मों में राजू जहां मौलिकता के लिए पहचाने गए, वहीं पीके के कहीं न कहीं से ‘प्रेरित’ होने की अटकलें लगती गईं। मुश्किल 2012 में निर्देशक उमेश शुक्ला की अक्षय कुमार-परेश रावल स्टारर ‘ओ माई गॉड’ की रिलीज के समय आई। इसकी रिलीज से पहले हिरानी ने मीडिया में कहा था कि पीके ईश्वर और धर्मगुरुओं को लेकर बुनी गई कहानी है।

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ओएमजी की वजह से बदलनी पड़ी स्क्रिप्ट

धार्मिक अंधविश्वासों पर इसमें व्यंग्य है और धर्मगुरुओं की पोल खोली गई है। ‘ओ माई गॉड’ भी इसी विषय पर थी। तब राजू को शूटिंग की योजना रोक कर स्क्रिप्ट पर फिर से काम करना पड़ा। जब तक वे काम पूरा कर पाते आमिर खान की ‘तलाश’ और ‘धूम-3’ में व्यस्त रहे। नतीजा यह कि पीके की शूटिंग आगे खिसकती गई।

जब हिरानी ने शूटिंग शुरू की तब अटकलें लगी कि आमिर इसमें भगवान बने हैं। आमिर की घाघरा पहने ट्रांजिस्टर के साथ लीक हुईं तीस्वीरों के साथ चर्चाएं आम हुईं कि वह भगवान नहीं अंतरिक्ष से धरती पर आया प्राणी यानी एलियन हैं। इसके बाद तो ऐसी फिल्मों के नाम आने लगे, जिनसे पीके को प्रेरित बताया जाने लगा।

इनमें 1985 की ऑस्ट्रेलियाई फिल्म ‘एलियन विजिटर’, 2001 की अमेरिकन साइंस फिक्शन ‘के-पेक्स’ और 2010 की हॉलीवुड साइंस फिक्शन ‘इंसेप्शन’ प्रमुख हैं। नतीजा यह निकला कि राजू और उनकी टीम ने फिल्म को लेकर खामोशी ओढ़ ली। संभवतः पहली बार ऐसा हुआ कि किसी फिल्म की रिलीज से पहले उसके ऐक्टरों और डायरेक्टर ने फिल्म के विषय पर एक लाइन की भी बात तक नहीं की। खैर, पीके के साथ सारे राज खुल चुके हैं।
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