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Prasoon Joshi: प्रसून जोशी ने की फिल्म निर्माण पर खुलकर बात, बोले- इस प्रक्रिया को रहस्यमय नहीं बनाना चाहिए

Thu, 21 Nov 2024 10:47 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

प्रसून जोशी ने इफ्फी 2024 में फिल्म निर्माण पर अपनी बात रखी और कहा कि इसे रहस्यमय नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कहानी का असली कंटेंट भाषा से परे होता है।
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प्रसून जोशी - फोटो : पीआईबी
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विस्तार
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मशहूर गीतकार प्रसून जोशी ने आज (21 नवंबर) गोवा में आयोजित इफ्फी 2024 के दौरान मास्टरक्लास 'द जर्नी फ्रॉम स्क्रिप्ट टू स्क्रीनः राइटिंग फॉर फिल्म एंड बियॉन्ड' में फिल्म निर्माण और लेखन प्रक्रिया पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कई बार हमारी कहानी के विचार समय से पहले ही मर जाते हैं, क्योंकि व्यावहारिक और रचनात्मक प्रतिबंधों के कारण हम अपने विचारों में विश्वास खो देते हैं। उन्होंने इसे कहानी की भ्रूण हत्या करार देते हुए कहा कि भारत एक ऐसी जगह है जहां ऐसा होता है।

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प्रसून जोशी - फोटो : पीआईबी
कंटेंट होता है भाषा से परे
प्रसून जोशी ने आगे यह भी कहा कि किसी भी कला को लगातार अभ्यास के बिना अधूरा नहीं छोड़ा जा सकता है। यह जरूरी है कि हम अपने क्राफ्ट पर निरंतर काम करें, क्योंकि अवसर आने पर हम अचानक अभ्यास शुरू नहीं कर सकते। उन्होंने आगे कहा, "सच्चा कंटेंट भाषा से बंधा नहीं होता और इस तरह से हम कह सकते हैं कि सबसे अच्छी कविता मौन में होती है, क्योंकि मौन एक ऐसी अनश्वर ध्वनि है जो हमें जोड़ती है। मौन ही सर्वोत्तम भाषा है।"

प्रसून जोशी - फोटो : पीआईबी
फिल्म निर्माण पर की खुलकर बात
फिल्म निर्माण के प्रक्रिया पर बात करते हुए प्रसून जोशी ने कहा कि हमें फिल्म बनाने की प्रक्रिया को रहस्यमय नहीं बनाना चाहिए। फिल्में रहस्यों से भरपूर हो सकती हैं, लेकिन फिल्म निर्माण का तरीका नहीं। उन्होंने तारे जमीन पर फिल्म के गीतों को बनाने में अपनी बचपन की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जब आप कुछ व्यक्तिगत रूप से बताते हैं तो वह सार्वभौमिक बन जाता है।

प्रसून जोशी - फोटो : इंस्टाग्राम @prasoonjoshilive
प्रसून जोशी ने किया मां को याद
अपनी लेखनी की प्रक्रिया के बारे में जोशी ने कहा कि उनकी मां उनकी कविताओं में कठिन शब्दों के इस्तेमाल पर टिप्पणी करती थीं, जिससे उनकी लेखन शैली में बदलाव आया। यह अनुभव उन्हें पाठकों के साथ गहरे स्तर पर जुड़ने में मददगार साबित हुआ। 

एआई पर कही यह बात
कृत्रिम मेधा (एआई) के प्रभाव पर बात करते हुए प्रसून ने कहा, "मैं एआई को हल्के में नहीं लेता। यह रचनात्मक क्षेत्रों में सबसे पहले प्रभाव डाल रहा है, जबकि इसे इन क्षेत्रों में बाद में आना चाहिए था।" उन्होंने यह भी कहा कि एआई गणितीय प्रक्रियाओं को तो समझ सकता है, लेकिनअगर किसी की कविता या कहानी किसी सच्चाई से उत्पन्न होती है तो एआई उस अनुभव को नहीं पैदा कर सकता।"
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भारत की असली कहानियां छोटे शहरों में होती हैं
प्रसून जोशी ने यह भी कहा कि हमें कहानी कहने की प्रक्रिया को कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने क्रिएटिव माइंड्स ऑफ टूमॉरो का उल्लेख किया करते हुए कहा कि अगर हमें भारत की असली कहानियां दिखानी हैं तो फिल्म निर्माण को देश के सबसे दूरदराज हिस्सों तक पहुंचाना होगा।
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