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फिल्म की कहानी का हिस्सा बन गए ये होली के सीन

Wed, 04 Mar 2015 03:48 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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कई सुपरहिट फिल्मों के सीन होली की वजह से ही आज लोगों के जहन में जिंदा है। आइए जानें फिल्मों के कुछ पॉपुलर होली सीन्स के बारे में।
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कहते हैं कि सन् 1944 में पहली बार निर्देशक अमिय चक्रवर्ती की फिल्म 'ज्वार भाटा' में होली का दृश्य शूट हुआ था। फिल्म के अभिनेता दिलीप कुमार थे।

इसके बाद तो जैसे निर्देशकों को अपनी फिल्म में अलग-अलग अंदाज में होली दिखाने और मनाने का मौका मिल गया।

फिल्म को अधिक रोचक बनाने, प्रेम संबंधों को प्रगाढ़ बनाने, प्रेम के फूल खिलवाने या फिर किसी घटना को अंजाम देने के लिए होली को सहारा बनाया जाने लगा।

जैसे 'दामिनी' जिसमें होली की एक घटना को पूरी फिल्म को आगे बढ़ाने का काम करती है। इसमें होली के दिन ही दामिनी (मीनाक्षी शेषाद्री) की नौकरानी के साथ हादसा होते हुए दिखाया गया है।

अगर देखा जाए तो बहुत सी ऐसी फिल्में हैं जिनमें या तो गीतों के सहारे या फिर किसी भी अच्छी-बुरी घटना को अंजाम देने के लिए होली के दृश्य दिखाए गए।

सन् 1975 में बनी फिल्म 'शोले' जिसमें धर्मेंद्र और हेमामालिनी होली के सीन में खूब मस्ती करते है, इसके ठीक बाद गाँव पर डाकुओं का हमला होता है।

सन् 1981 में फिल्म 'सिलसिला' में "रंग बरसे" गीत गाते हुए अमिताभ बच्चन रेखा से सरेआम होली का बहाना कर इश्क लड़ाते हैं। इस गीत में रेखा के पति बने संजीव कुमार का अभिनय भी देखने लायक है।
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वहीं 1984 में फिल्म 'होली' में यंग आमिर खान को कैंपस में राजनीति के माहौल में होली खेलते दिखाया गया है।

फिल्म 'डर' में शाहरूख खान अपने वायदे के मुताबिक जूही को रंग लगाने में कामयाब हो जाता है।

फिल्म 'मोहब्बतें' में सभी छात्र अपनी प्रेमिकाओं के साथ गुरूकुल से बाहर जाकर होली मनाने में सफल होते है।

होली का भला प्रतिशोध से क्या लेना-देना? लेकिन फिल्म 'जख्मी' का गीत "दिल में होली जल रह रही है", फिल्म के नायक के भीतर सुलग रहे गुस्से को दर्शाता है।

राजेश खन्ना और स्मिता पाटिल की फिल्म 'आखिर क्यों' में होली का एक सीन रिश्तों के बीच एक नई उलझन खड़ी कर देता है।

ऐसी कई फिल्में हैं, जैसे- 'बागबान', 'दीवाना', 'मंगल पांडे', 'वक्त', 'आखिर क्यों', 'फागुन', 'जख्मी', 'मदर इंडिया', 'मशाल', 'कटी पतंग', 'दिल्ली हाईट्स' में भी होली के दृश्य यादगार बन पड़े हैं।
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लेकिन पिछले कुछ सालों में देखा जाए तो बॉलीवुड फिल्मों में होली के सभी रंग लगभग नदारद होने लगे हैं। जिस तरह से लोगों की रूचि और समाज में बदलाव आए; होली सीन भी फिल्मों में कम होने लगे।

रंगो से सरोबार कलाकर अपने ही रंग में जमते थे लेकिन अब तो हाल यह है कि दूर-दूर तक निर्देशक होली के रंगों को परदे पर उतारने में रूचि नहीं ले रहे।
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