मनोज बाजपेयी ने साझा किए संघर्ष के दिनों की यादें
मनोज बाजपेयी ने हाल ही में मिंट के लिए उद्यमी रितेश अग्रवाल के साथ बातचीत करते हुए नजर आए। इस दौरान अभिनेता ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि वो पहले दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहते थे, जहां वो छोटे छत वाले कमरों में रहते थे, जिसे बरसाती कहा जाता है। वहां उन्हें गर्मियों में अत्यधिक गर्मी और सर्दियों के मौसम में ठंड के साथ कठिन समय का सामना करना पड़ता था। उस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, "बरसाती का एकमात्र फायदा यह है कि वे सस्ती होती हैं, लेकिन गर्मियों में वहां बहुत गर्मी होती थी और सर्दियों में बहुत ठंड होती थी। अगर बाहर का तापमान 40 डिग्री होता तो अंदर 45 डिग्री जैसा महसूस होता। यह नरक जैसा था।"
दोस्तों ने कभी मनोज बाजपेयी को भूखा नहीं सोने दिया
मनोज बाजपेयी ने चुनौतियों का सामना करना जारी रखा, क्योंकि वह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अभिनय कर रहे थे। अपने हुनर को निखारने के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनके दोस्तों ने उनके खाने का खर्च उठाया या व्यवस्था की ताकि वह बिना खाए न सोएं। उन्होंने बताया, "थिएटर से मुझे पैसे तो नहीं मिलते थे, लेकिन इससे मैं व्यस्त रहता था। मैं 18 घंटे काम करता था और मैं कभी भूखा नहीं सोया, इसका श्रेय मेरे दोस्तों को जाता है। अगर मैं दोपहर का खाना भी नहीं खा पाता था, तो मेरे दोस्त अपनी आधी रोटी मेरे साथ खाते थे।"
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भूख से बचने के लिए निकाली ये खास तरकीब
अभिनेता ने आगे बताया कि जब वह बिना पैसे के मुंबई चले गए और ऑडिशन के लिए एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो में भटकने लगे, तो स्थिति और भी गंभीर हो गई। काम की कमी के कारण उन्हें खाने के लिए भी कुछ नहीं मिल रहा था। इसके अलावा, तमाम संघर्षों से जूझते हुए वह शारीरिक और भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस करने लगे। उन्होंने बताया, "मैं पूरे दिन भूखा रहता था। जब हम काम के लिए प्रोडक्शन वालों के पास जाते तो वे हमें बाहर निकाल देते।" इन चुनौतियों के बावजूद, अभिनेता ने हार नहीं मानी और भोजन खोजने का एक अनूठा तरीका खोज निकाला। वह लंच से ठीक पहले फिल्म सेट पर जाते थे और सेट पर किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढते थे, जिसे वो जानते थे। इस दौरान वह व्यक्ति उन्हें भोजन के लिए आमंत्रित करता था और उन्हें भूखा नहीं रहना पड़ता था।
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