रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार को दर्शाने वाला त्योहार है। आज 28 अगस्त को देश के साथ दुनियाभर में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन के त्योहार को और खास बनाते हैं बॉलीवुड के गाने। इन गानों में 'फूलों का तारों का' गाना भी शामिल है। साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का यह गाना रक्षाबंधन को दर्शाता है। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि यह गाना कभी रक्षाबंधन के लिए बना ही नहीं था।
'हरे रामा हरे कृष्णा' के बारे में जानकारी
फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' के निर्देशक देव आनंद थे। इसमें देव आनंद, मुमताज, जीनत अमान और प्रेम चोपड़ा अहम किरदारों में थे। फिल्म काफी कामयाब रही थी। फिल्म में पश्चिमी देशों के पीछे भागने की मानसिकता को दिखाया गया था।
दिवंगत गायिका लता मंगेशकर
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
किसने लिखा था गाना?
इस फिल्म को आर.डी. बर्मन ने म्यूजिक दिया था। गाने 'फूलों का तारों का' के गीतकार आनंद बख्शी थे। इस गाने के दो वर्जन थे। एक वर्जन को लता मंगेशकर ने आवाज दी थी। दूसरे वर्जन को किशोर कुमार ने गाया था। दोनों गाने फिल्म में अलग-अलग मौकों पर इस्तेमाल हुए थे।
रक्षाबंधन के लिए नहीं था 'फूलों का तारों का' गाना
- आरडी बर्मन ने इस बात का खुलासा किया था कि 'फूलों का तारों का' गाने को रक्षाबंधन के गाने के तौर पर नहीं बनाया गया था।
- इसका विचार फिल्म की कहानी के हिसाब से आया था।
- हालांकि वक्त के साथ यह गाना भाई-बहन के प्यार को दर्शाने वाला बन गया।
- आज जैसे ही 'फूलों का तारों का, सबका कहना है...' गाना बजता है तो लोगों को रक्षाबंधन याद आता है।
आर डी बर्मन
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लता मंगेशकर ने किया था कमाल
खास बात यह है कि लता मंगेशकर ने 10 साल के लड़के मास्टर सत्यजीत की आवाज निकालने के लिए मॉड्यूलेशन किया था। उन्होंने अपनी आवाज कुछ इस तरह से बदली थी कि यह बच्चे जैसी लगती थी। आर.डी. बर्मन अपनी बायोग्राफी में लिखा 'लता ने कुछ कमाल का किया। उन्होंने अपनी आवाज को एक छोटे लड़के जैसा बनाया, क्योंकि कहानी के बचपन वाले हिस्से में इसकी जरूरत थी।'