पिता पंकज कपूर और मां सुप्रिया पाठक के साथ शाहिद कपूर
पीयूष सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में बताया, ‘सहर एक कश्मीरी ब्राह्मण कौल साहब की कहानी है, जो उर्दू के शायर हैं। प्रोफेसर हैं। उनके कॉलेज का उर्दू विभाग बंद हो रहा है और वह उसे जिंदा रखने का संघर्ष कर रहे हैं। कौल साहब की कोशिशों से दोनों तरफ के कट्टरपंथियों को समस्या है। हिंदू कहत हैं कि हिंदू होकर उर्दू के लिए क्यों लड़ रहे हो और मुस्लिम मौलाना कहते हैं कि उर्दू से तुमको क्या मतलब, यह हमारी कौम की भाषा है।’
फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे कौल साहब की कोशिशें सोशल मीडिया पर समर्थन पाती हैं और उर्दू को बचाने के लिए आंदोलन लखनऊ में आंदोलन चल पड़ता है। मगर फिल्म का अंत हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देगा। फिल्म लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब के लिए एक संयुक्त आवाज की तरह उभरती है।
यूपी के जौनपुर में जन्मे और लखनऊ में शिक्षा हासिल करने वाले पीयूष सिंह कहते हैं, ‘फिल्म में यह बात भी कही गई है कि पूंजीवादी मानसिकता हमें अंग्रेजी परस्त बनने की तरफ ढकेलती है। बच्चों को अंग्रेजी ही सिखाने पर जोर देती है। लेकिन यह बाते आगे उर्दू की तरह ही हिंदी को भी मुश्किल में डाल देगी।’
पंकज कपूर इसी टीम के साथ एक और फिल्म कर रहे हैं। जिसका नाम है जेएल 50। यह इंटरनेशनल प्रोजेक्ट है जो कनाडा के साथ मिलकर बनाया जा रहा है। इसमें अभय देओल भी नजर आएंगे। कोलकाता में आधारित इस फिल्म की 80 फीसदी शूटिंग हो चुकी है। इसके अलावा पीयूष सिंह अगले साल अपनी मनोज बाजपेयी स्टारर भोंसले रिलीज करेंगे। इसका बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसका प्रीमियर हुआ था और कई अंतरराष्ट्रीय महोत्सवों में इसका प्रदर्शन जारी है। सिंह ने बताया कि भोंसले को संभवत: मार्च में रिलीज किया जा सकता है।