इसके बाद ‘पान सिंह तोमर’, ‘चंबल इन बॉलीवुड’, ‘संध्या’, ‘कैफे ईरानी चाय’, ‘मीडियम रेयर’ (इटली), ‘वरम’ (अमेरिकी), ‘यक्षी’ (दुबई), ‘लिटिल आईज’ (ऑस्ट्रेलिया), ‘मृगतृष्णा’ (नेपाल), ‘द सीक्रेट लाइफ ऑफ बैलूंस’ (लंदन), ‘विद माय ओन टू हैंड्स’ (पैरिस), ‘काउंटर’ (शिकागो), ‘मेहरम’ (मुंबई) और ‘रेपरक्युशन’ (ईरान) फिल्में दिखाई गईं।
के. आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल इस बात के लिए भी याद किया जाएगा कि इस उत्सव का भी अपना गीत है। समारोह में वाइल्ड फोटोग्राफर राजीव तोमर, प्रसिद्ध दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम और वरिष्ठ पत्रकार ज्योति लवानिया द्वारा कैद की गई तस्वीरों की प्रदर्शनी लगी, जो चंबल के विभिन्न आयामों को पेश करती हैं।
फिल्म फेस्टिवल के दौरान देश विदेश में हजारों किलोमीटर की दूरी बाइक से तय करने वाले डा. देव ने कहा कि परमिट लाइन के अवशेषों को खोजकर उस पर एक फिल्म बनाना चाहता हूं। दरअसल आजादी से पहले हिंदोस्तान के नमक का खासा महत्व था, इसीलिए इसकी तस्करी भी बड़े पैमाने पर की जाती थी। 1820 से लेकर 1880 तक परमिट लाइन वजूद में रही। उसके बाद नामक पर जो टैक्स था, जो पूरे भारत में सामान्य हो गया था, फिर परमिट लाइन की जरूरत नहीं थी।