फिल्म आरआरआर का गीत नाटू-नाटू तेज गति से लय में झूमने को मजबूर कर देता है। हालांकि, गाने के निर्माण की प्रकिया अथाह धैर्य, निष्ठा और संकल्प की बेहतरीन कहानी है। फिल्म के निर्देशक एसएस राजमौली गाने के जरिये साल 1920 के सामाजिक-आर्थिक हालात के बीच दोस्ती की कहानी को बयां करना चाहते थे। लेखक चंद्रबोस ने इसके लिए 20 गाने लिखे, जिनमें से आखिर में नाटू-नाटू ने फिल्म में जगह बनाई।
ऐसे लिखा गया पूरा गाना
चंद्रबोस के मुताबिक, गाने का 90 फीसदी हिस्सा, तो महज आधे दिन में तैयार हो गया था। लेकिन, आखिरी 10 फीसदी को पूरा करने में 19 महीने लग गए। गाना लिखने के बाद जब संगीतकार एमएम कीरावनी ने इसे कंपोज करना शुरू किया, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती 1920 के दौर को ध्यान में रखकर धुन तैयार करना था, लेकिन जरूरी यह भी था कि मौजूदा दौर में यह बेस्वाद न लगे।
स्टेप्स तैयार करने में भी चुनौती
कीरावनी के बाद कोरियोग्राफर प्रेम रक्षित के सामने राजामौली ने चुनौती रखी कि उन्हें ऐसे स्टेप्स चाहिए, जो दो दोस्त एक साथ कर सकें, लेकिन ये स्टेप्स इतने पेचीदा न हों कि दूसरे लोग इसे दोहरा न पाएं। रक्षित ने गाने के हुक स्टेप को इस कसौटी पर खरा बनाने के लिए दो महीने में 110 मूव्स बनाए और आखिरी नतीजा सबके सामने थे।
फिर शूटिंग के लिए मशक्कत
इस गाने की दिलचस्प कहानी यहां खत्म नहीं होती है। बल्कि, इसका दूसरे अध्याय यानी फिल्मांकन शुरू होता है। राजमौली के मुताबिक गाने की शूटिंग के लिए वह एक भव्य जगह चाहते थे। लेकिन, जब गाने की शूटिंग होनी थी, तो भारत में मानसून का दौर चल रहा था।
आखिर यहां खत्म हुई तलाश
इसी बीच अचानक उन्हें यूक्रेन का राष्ट्रपति भवन (मारिंस्की पैलेस) दिखा। यह हू-ब-हू वैसा था, जैसा वे सेट बनाने के बारे में सोच रहे थे। वे अगस्त 2021 में शूटिंग के लिए यूक्रेन पहुंचे। यहां करीब 400 जूनियर आर्टिस्ट और 50 बैकग्राउंड डांसर के साथ 1000 लोग थे। 4.35 मिनट के गाने को फिल्माने में उन्हें 20 दिन लगे और 43 रीटेक हुए। अंत में 15.13 करोड़ की लागत में यह बेजोड़ गाना तैयार हुआ।