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सनी देओल के 'गदर बेटे' ने कहा, जिसके जीवन का कोई मकसद है वो 'जीनियस' है

Fri, 03 Aug 2018 10:29 PM IST
रवि बुले
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Utkarsh Sharma
उत्कर्ष शर्मा के डेब्यू पर बॉलीवुड की नजरें हैं। कालयजी 'गदर: एक प्रेमकथा' में सनी देओल के पुत्र जीते बने उत्कर्ष बतौर हीरो फिल्म 'जीनियस' में आने को तैयार हैं। वह निर्माता-निर्देशक अनिल शर्मा के पुत्र हैं लेकिन अपनी पहचान बनाने के लिए कमर कसे हैं। उन्होंने चार साल अमेरिका में सिनेमा की पढ़ाई और पुख्ता तैयारी की। उत्कर्ष शर्मा से उनके जीवन, लक्ष्य और जीनियस को लेकर रवि बुले की विशेष बातचीत...

-आपके पिता 35 साल से फिल्म डायरेक्टर हैं। आप बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट उनकी फिल्मों में आए। वह कौन सा मौका था जब आपने पूरी तरह इसे करियर बनाने का फैसला किया?
- बात तब की है जब पापा फिल्म 'वीर' की शूटिंग कर रहे थे। लंदन का शेड्यूल था। जो वहां ब्लास्ट वगैरह होने के कारण थोड़ा लेट हुआ और तब तक मेरे टेंथ क्लास के एक्जाम हो गए। मुझे लगा कि इससे बढ़िया क्या हो सकता है कि मैं पापा के साथ शूटिंग में जाऊं और उन्हें असिस्ट करूं। तब मैं कैमरे के सामने क्लैप देता था। इस फिल्म से जुड़कर मैंने खुद में कई बदलाव महसूस किए।

-क्या यह लाइफ का टर्निंग पॉइंट था?
- ऐसा मान सकते हैं। इस फिल्म से मैंने बहुत सीखा। हालांकि मैं नौसिखिया था लेकिन मैंने नोट किया कि फिल्म कितनी मेहनत से शूट की जाती है। कितनी बारीकियां होती हैं। ड्रेसेस से लेकर सीन की एक-एक चीज पर कितना ध्यान दिया जाता है। कैसे पूरी फिल्म बनाने के लिए एक-एक शॉट लिया जाता है। वीर से मैंने समझ लिया था कि फिल्मों में सफल होना है तो मेहनत से नहीं बच सकते।
 
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utkarsh sharma
-आपने सनी देओल, अमरीश पुरी और अमिताभ बच्चन के साथ बचपन में काम किया। सलमान को पूरी फिल्म करते देखते रहे। कम उम्र में इन लोगों को देखना कैसा अनुभव था?

- वह सिखाने वाले अनुभव थे। पहले तो मैं बच्चा था परंतु सलमान सर को देखते हुए कुछ समझदार हो गया था। कैमरे के पीछे से उन्हें ऐक्टिंग करते देख मेरे रोंगटे खड़ हो जाते थे कि अभी तो ये बैठ कर कॉफी पी रहे थे और अब ऐक्टिंग करते हुए मेरे मन में इमोशंस पैदा कर रहे हैं। तब मुझे लगा कि इन्हें देख कर मेरे मन में जो भावनाएं पैदा हो रही हैं, काश मैं भी दूसरों के मन में ऐसा कर सकूं। मेरे ऐक्टर होने के मकसद यही है कि लोगों को हंसा सकूं, रुला सकूं।
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utkarsh sharma
-आपने ऐक्टिंग की विधिवत शिक्षा लेने की जरूरत क्यों महसूस की?

- वीर की शूटिंग में मैंने तय किया कि इस फील्ड में आऊंगा तो पूरी तैयारी से। भारतीय फिल्मों का ज्ञान अलग है और वेस्ट फिल्मों तथा ऐक्टिंग को अलग नजरिये से देखता है। मुझे यह फर्क समझना था। मुझे लगा कि ये दोनों ढंग सीख कर अपनी ऐक्टिंग में शायद कोई नई बात ला सकूं। इसी प्यास को बुझाने के लिए अमेरिका गया। ऐक्टिंग और फिल्म मेकिंग से जुड़ी तमाम पढ़ाई की।

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utkarsh sharma and ishita chauhan
-ऐक्टिंग सीखते हुए सबसे अहम बात क्या पता चली?

- इमोशंस युनवर्सल हैं। आप जो ऐक्टिंग करते हुए महसूस करते हो पर्दे पर वही दिखता है।

-जीनियस आपके पिता बना रहे थे। इसके अलावा आपको क्यों लगा कि इसे डेब्यू फिल्म होना चाहिए?

- जीनियस किसी भी डेब्यू ऐक्टर के लिए कंप्लीट पैकेज है। नए अंदाज की कहानी है। इसमें दो जीनियसों का टकराव है। मेरे किरदार के इसमें कई रंग हैं।
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Utkarsh Sharma
-आपका कैरेक्टर क्या है इसमें?
- मैं मथुरा-वृंदावन का एक लड़का हूं। अनाथ हूं। यह लड़का जिंदगी में प्यार पाना चाहता है। इत्तेफाक से वह जीनियस है और उसकी सोच हाई-टेक है। अपनी क्षमता के बल पर वह रॉ जाइन करता है और तब उसका दूसरे जीनियस से टकराव होता है। जो नवाजुद्दीन सिद्दिकी प्ले कर रहे हैं।

-जीनियस तो इधर बहुत लोग हैं। आपके लिए जीनियस कौन इंसान है?
- मेरे लिए वो जीनियस है, जो झूठा नहीं है। जो सत्य का साथ देता है। जो परिवार और अपने लोगों के लिए लड़ता है, जिसके जीवन कोई मकसद है वो मेरे लिए जीनियस है।
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anil sharma and utkarsh sharma
पापा कहते हैं
-अनिल शर्मा को उत्कर्ष की प्रतिभा पर पूरा विश्वास है। वह कहते हैं, ‘मैंने उसे ग्रो होते हुए देखा। जब पहली बार गदर में उत्कर्ष का स्क्रीन टेस्ट लिया था, तभी उसमें एक्टर बनने की संभावनाओं को देख लिया। फिर उसने अमिताभ बच्चन सरीखे कलाकार के साथ जिस आत्मविश्वास से अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो में काम किया, उसके बाद एक्टर होने की संभावनाएं पुख्ता हो गई थीं। हम पिता-पुत्र होने के साथ अच्छे फ्रेंड्स हैं। उसके प्रति मैं बहुत कॉन्फिडेंट हूं। हमारी कैमेस्ट्री आपको फिल्म में नजर आएगी।’
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