समीर ने अमेरिका में जाकर अभिनय नहीं किया, बल्कि जावा कोडर के रूप में नौकरी कर ली। लेकिन, उनकी नौकरी वर्ष 2008 में छूट गई जब अमेरिका में मंदी आई। समीर ने बताया कि वह अमेरिका में रहकर खुश थे और वहां उन्हें कोई एक अभिनेता के रूप में नहीं जानता था। यही कारण रहा कि उन्हें अभिनय छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में हाथ आजमाना पड़ा। समीर बताते हैं कि जब वह देश में भी थे तब भी उन्हें काम के लिए बहुत ज्यादा ऑफर नहीं मिलते थे। और जो मिलते थे वह धारावाहिक 'नुक्कड़' में निभाए किरदार खोपड़ी के जैसे ही थे।
समीर का कहना है कि जब वह अमेरिका से वापस लौटे तो वह अपने दोस्तों से काम मांगने के लिए नहीं गए। उन्हें आगे जो भी काम मिला, वह उनके पिछले काम को देखकर ही मिल रहा था। समीर का कहना है कि कोई भी कलाकार एक अच्छा अभिनेता नहीं बन सकता अगर वह चारों तरफ काम ही मांगता फिरे। समीर कहते हैं, 'इस मामले में मैं थोड़ा पुराने स्कूल का आदमी हूं। मैं काम के लिए चारों तरफ खुद को बेच नहीं सकता। मुझे नहीं पता कि बाजार आखिर किस तरह चलता है लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूं कि जो लोग मुझे जानते हैं और उनके पास अगर मेरे लायक कुछ काम आएगा तो वह मुझ तक खुद ब खुद पहुंच जाएंगे।'
समीर ने अभिनय में अपने करियर की शुरुआत धारावाहिक 'नुक्कड़' से ही की थी। उसके बाद उन्हें दूरदर्शन के ही धारावाहिक 'सर्कस' में चिंतामणि की भूमिका निभाते हुए देखा गया। डीडी मेट्रो के धारावाहिक 'श्रीमान श्रीमती' में भी समीर ने फिल्म निर्देशक टोटो की भूमिका निभाई। और, कुछ समय पहले उन्हें धारावाहिक 'संजीवनी' में भी गुड्डू माथुर की भूमिका निभाते हुए देखा गया। समीर कुछ साल पहले 'हंसी तो फंसी', 'जय हो', 'पटेल की पंजाबी शादी' जैसी फिल्मों में भी नजर आए।